'जंग के मैदान में नए पत्ते खोलने के लिए तैयार...' ट्रंप की धमकी पर ईरान की दो टूक
अमेरिका की नाकाबंदी और सैन्य कार्रवाई जैसी धमकियों के बीच ईरान ने कड़ा रुक अपनाते हुए कहा है कि वो जंग के मैदान में नए पत्ते खोलने के लिए तैयार हैं.
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है. दरअसल, पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर शंकाएं बढ़ने लगी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विरोधाभासी बयान दिए हैं, जिससे बातचीत के भविष्य को लेकर और भ्रम पैदा हो गया है. बता दें कि दोनों देशों के बीच 14 दिन का संघर्षविराम बुधवार को खत्म होने वाला है. डेडलाइन नजदीक आ चुकी है, लेकिन सुलह का होना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है.
ट्रंप ने कहा कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को आगे की चर्चा के लिए पाकिस्तान भेजा जाएगा. हालांकि, ईरान ने यह साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपना कड़ा रुख नहीं ब दलता है, तब तक बातचीत में शामिल नहीं होगा.
बाघर गालिबफ ने की यूएस की आलोचना:
संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने अमेरिका के रवैये की आलोचना करते हुए कहा है कि ईरान धमकियों के बीच बातचीत नहीं करेगा. साथ ही कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान नई स्ट्रैटिजी के साथ आएगा. गालीबफ ने अपने पोस्ट में यह साफ कहा है कि ट्रंप नाकाबंदी और सीजफायर का उल्लंघन करके इस बातचती को समर्पण की बातचीत में बदलना चाहते हैं या फिर युद्ध भड़काने को सही ठहराना चाहते हैं. यहां पढे़ं पोस्ट-
समझौता नहीं होता है तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं- ट्रंप
ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह रोकना है. उन्होंने पुष्टि कर बताया है कि जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी. ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं होता है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं. ऐसा होने पर ईरान पर सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष विराम को बढ़ाना बेहद असंभव है. ईरान ने दबाव में किसी भी बातचीत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
इस बीच, इस क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की, जिससे कोई रास्ता निकाला जा सके. अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत का पहला दौर 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुआ था, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचने में नाकाम रहे. असहमति के मुख्य बिंदु ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बने हुए हैं.