BRICS समिट से पहले पुतिन और ट्रंप के बीच एक घंटे फोन पर हुई बातचीत, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत हुई. दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने, अमेरिका-रूस के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने तथा कैदियों की अदला-बदली जारी रखने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की.
क्रेमलिन से मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पुतिन के बीच मंगलवार को लगभग एक घंटे तक बातचीत हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पुतिन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आने की तैयारी कर रहे हैं.
अमेरिकी और रूसी राष्ट्रपति के बीच हुई इस बातचीत के बारे में जानना, इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दोनों देशों ने यूक्रेन के मुद्दे पर भी चर्चा की है. ऐसे में पांच साल से चल रहे युद्ध के भी खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है. तो चलिए जानते हैं कि दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई?
युद्ध खत्म करने के बाद व्यापार पर जोर
बातचीत के दौरान ट्रंप ने यूक्रेन में जारी संघर्ष को जल्द खत्म करने की इच्छा जताई. क्रेमलिन के अनुसार उनका मानना है कि युद्ध समाप्त होने से अमेरिका और रूस के रिश्तों में सुधार का रास्ता खुल सकता है. ट्रंप ने युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका और रूस के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध दोबारा मजबूत करने की संभावना पर भी चर्चा की. हालांकि बातचीत के बाद किसी नए व्यापार समझौते या आर्थिक करार की घोषणा नहीं की गई.
Also Read
क्रेमलिन के अनुसार पुतिन ने ट्रंप को यूक्रेन के युद्धक्षेत्र की मौजूदा स्थिति के बारे में अपना आकलन दिया. दोनों नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि संघर्ष खत्म कराने में अमेरिका किस तरह मदद कर सकता है. ट्रंप और पुतिन ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर की हालिया मॉस्को और कीव यात्रा की भी समीक्षा की. क्रेमलिन ने इन बैठकों को सकारात्मक बताया. हालांकि तत्काल किसी त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन की घोषणा नहीं हुई.
कैदियों की अदला-बदली जारी रखने पर सहमति
दोनों नेताओं ने रूस और यूक्रेन के बीच कैदियों की अदला-बदली जारी रखने की जरूरत पर सहमति जताई. यह उन चुनिंदा मुद्दों में शामिल है, जिन पर युद्ध के बावजूद दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही है. अब आने वाले समय में ही इसका पता चल पाएगा कि दोनों देशों पर इस बातचीत का क्या असर पड़ा है.