समर्थन, सुरक्षा और सत्ता... क्या 5 दशक बाद ईरान वापस लौटेंगे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी?
राजनीतिक विश्लेषक शाहिन मोदर्रेस के अनुसार, रजा पहलवी का समर्थन केवल समाज के एक छोटे वर्ग तक ही सीमित है. ये लोग पुराने समय की राजशाही को याद करते हैं और सोचते हैं कि राजशाही लौटने पर उनका फायदा होगा.
नई दिल्ली: ईरान में मुद्रा की गिरावट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन दो हफ्ते से जारी हैं. इन प्रदर्शनों में अब तक 60 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है. हाल के प्रदर्शन में ईरान के कथित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का नाम तेजी से चर्चा में आया है. उनके समर्थक सड़कों पर 'रजा वापस आओ' के नारे लगा रहे हैं. सवाल यह उठ रहा है कि क्या 50 साल बाद रजा तेहरान लौट सकते हैं?
50 साल बाद ईरान लौटेंगे रजा?
ईरानी शाह के सबसे बड़े बेटे रजा पहलवी 1978 में मात्र 17 साल की उम्र में पायलट ट्रेनिंग के लिए अमेरिका चले गए थे. उसी समय ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और 1979 में देश में राजशाही खत्म हो गई. उनके पिता को देश छोड़ना पड़ा. तब से रजा विदेश में हैं. हाल के प्रदर्शनों में वे सक्रिय हो गए हैं. रजा पहलवी अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.
रजा पहलवी को भारी समर्थन?
ईरान में उनके समर्थन को लेकर अलग-अलग राय है. कुछ लोग मानते हैं कि अगर मौजूदा सरकार गिर गई तो रजा की वापसी हो सकती है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि उनका वास्तविक समर्थन केवल सोशल मीडिया तक सीमित है. वहीं, कनाडा की राजनेता गोल्डी घमरी ने सोशल मीडिया पर कहा कि रजा पहलवी को ईरान में 85% समर्थन मिलता है, जबकि ट्रंप को 60% समर्थन है.
'ईरान में कदम नहीं रख सकते रजा'
राजनीतिक विश्लेषक शाहिन मोदर्रेस के अनुसार, रजा पहलवी का समर्थन केवल समाज के एक छोटे वर्ग तक ही सीमित है. ये लोग पुराने समय की राजशाही को याद करते हैं और सोचते हैं कि राजशाही लौटने पर उनका फायदा होगा. खामनेई शासन के तहत रजा कभी भी ईरान में कदम नहीं रख सकते और अगर भविष्य में शासन बदल भी गया तो उनके लिए सुरक्षा खतरे बने रहेंगे. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड और अन्य सुरक्षा संगठन उन्हें निशाना बना सकते हैं.
ट्रंप का रुख भी महत्वपूर्ण
डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी महत्वपूर्ण है. ट्रंप खामनेई शासन के कट्टर विरोधी हैं और उन्होंने रजा पहलवी को अच्छा व्यक्ति बताया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रजा से मिलना अभी उचित नहीं होगा. इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका भी रजा के खुले समर्थन में सीधे कदम नहीं उठा रहा है. सोशल मीडिया पर दिख रहे उत्साह के बावजूद, रजा के लिए ईरान लौटना इतना आसान नहीं होगा.
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