'पहले हथियार दिए, अब आतंकवादी कहते हैं', PoK में पाकिस्तानी सेना पर बरसे आंदोलनकारी
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने पाकिस्तानी सेना पर आतंकवाद को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाए. आंदोलनकारियों ने अपनी मांगें नहीं माने जाने पर संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी.
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. रावलकोट में हजारों लोग बीते कई दिनों से पाकिस्तान सरकार और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी दौरान आंदोलन के नेताओं ने सार्वजनिक मंच से पाकिस्तानी सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमान खान ने कहा कि जिन लोगों को कभी हथियार दिए गए, आज उन्हीं पर आतंकवादी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं. इन बयानों के बाद आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है.
रावलकोट की रैली में सेना पर लगाए गंभीर आरोप
रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में जेएएसी नेता सरदार अमान खान ने पाकिस्तान की सेना और प्रशासन पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में कश्मीरियों को हथियार उपलब्ध कराए गए, जबकि अब उन्हीं लोगों को आतंकवादी बताया जा रहा है. खान ने कहा कि यह विरोधाभास जनता के सामने है और लोग इसका जवाब मांग रहे हैं. उनके भाषण के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया.
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आतंकी रैली का भी किया जिक्र
सभा को संबोधित करते हुए सरदार अमान खान ने पिछले वर्ष फरवरी में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि हथियारबंद लोग खुलेआम रैली निकाल रहे थे. उनका आरोप था कि उस दौरान स्थानीय प्रशासन ने न केवल कार्यक्रम की अनुमति दी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध कराई. उन्होंने कहा कि आज शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि पहले हथियारों के साथ निकलने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
38 मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज
प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी 38 मांगों पर अमल नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. आंदोलन के नेताओं का कहना है कि यह केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में जनआंदोलन का रूप ले सकता है. उन्होंने दावा किया कि लोगों में सरकार के प्रति असंतोष लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में नागरिक आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं. रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई है.
भारत से संबंधों का भी उठा मुद्दा
रैली के दौरान कुछ वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि हालात नहीं बदले तो क्षेत्र के भविष्य को लेकर नए विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. भाषणों में भारत के साथ संबंधों का मुद्दा भी उठाया गया और कहा गया कि मौजूदा व्यवस्था से लोगों में निराशा बढ़ रही है. फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं. आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी.