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पाकिस्तान का नया दुश्मन जो अफगानिस्तान में बैठकर लिख रहा है उसके विनाश की कहानी, करा रहा घातक हमले

Pakistans New Enemy: पाकिस्तान यह दावा करता है कि नूर वाली महसूद को भारत से मदद मिल रही है, जबकि भारत कई बार इसका खंडन कर चुका है.

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Sagar Bhardwaj

Pakistans New Enemy: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दशकों की सबसे गंभीर झड़प में नूर वाली महसूद का नाम प्रमुख है. टीटीपी का यह सरगना अफगानिस्तान में छिपा है और पाकिस्तानी सरजमीं पर लगातार हमले करवा रहा है. काबुल में हालिया हवाई हमले में उसे निशाना बनाया गया, लेकिन वह बच निकला. अफगान तालिबान पाकिस्तान पर आईएसआईएस को शरण देने का आरोप लगाता है. महसूद ने टीटीपी को पुनर्जीवित किया है, लेकिन पाकिस्तान में इसकी कोई लोकप्रियता नहीं.

चरम पर पहुंचा पाक-अफगानिस्तान तनाव

दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर लगातार गोलीबारी ने पुराने घाव फिर से खोल दिए हैं. इस संघर्ष के केंद्र में है एक ऐसा चेहरा, जिसे पाकिस्तान अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है. नूर वाली महसूद, टीटीपी का सरगना, अफगान मिट्टी से पाकिस्तानी सेना पर हमले का संचालन कर रहा है. हालिया काबुल हवाई हमला इसकी मिसाल है. यह कहानी न केवल सीमा विवाद की है, बल्कि विचारधारा और राष्ट्रीयता के संघर्ष की भी.

 नूर वाली ने फिर से खड़ा किया TTP

नूर वाली महसूद ने 2018 में टीटीपी की कमान संभाली, जब उसके तीन पूर्ववर्ती अमेरिकी ड्रोन हमलों में मारे गए थे. पाकिस्तानी सेना के अभियानों ने संगठन को उसके गढ़ों से बाहर धकेल दिया था, लेकिन महसूद ने इसे अफगानिस्तान में रहकर फिर से जीवित किया. धार्मिक विद्वान के रूप में प्रशिक्षित यह सरगना कूटनीतिक चालाकी से गुटों को एकजुट करने में सफल रहा. अफगान तालिबान के 2021 में सत्ता हथियाने के बाद टीटीपी को हथियारों और संगठन का विस्तार करने में सहूलियत मिली.  टीटीपी के हमले मुख्य रूप से सेना और पुलिस पर केंद्रित हैं, क्योंकि महसूद जानता है कि नागरिकों पर वार से पाकिस्तान में घृणा बढ़ती है. इस साल जारी एक दुर्लभ वीडियो में उसने पाकिस्तानी सेना को इस्लाम-विरोधी करार दिया और जनरलों पर 78 साल से लोगों का अपहरण करने का आरोप लगाया.

पश्तून समुदाय का मसीहा होने का दावा

महसूद धार्मिक तर्कों को राष्ट्रवाद से जोड़ता है. उसकी कम से कम तीन किताबें हैं, जिनमें 700 पृष्ठों का एक ग्रंथ ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष को टीटीपी विद्रोह का मूल बताता है. विशेषज्ञ अब्दुल सईद के अनुसार, महसूद पश्तून समुदाय की आवाज बनने का दावा करता है, जो पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम और अफगानिस्तान में रहता है. वह अफगान तालिबान जैसी सरकार की मांग करता है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम या देश के अन्य हिस्सों में टीटीपी को जनसमर्थन न के बराबर है. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि संगठन इस्लाम का अपवित्रकरण करता है और भारत इसका समर्थक है, जिसे नई दिल्ली खारिज करती है.