ईरान के बाद पाकिस्तान की बारी? इजरायल से खौफ में इस्लामाबाद, क्या बोले पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ
ईरान पर इजरायल-अमेरिका हमलों के बाद पाकिस्तान में डर का माहौल है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि ईरान के बाद इजरायल पाकिस्तान को निशाना बना सकता है. पाकिस्तान के परमाणु हथियार इजरायल की सबसे बड़ी चिंता हैं.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रहा है. लेबनान और गाजा में इजरायली हमलों के बीच पाकिस्तान में यह सवाल तेजी से उभर रहा है कि क्या इजरायल की अगली नजर इस्लामाबाद पर होगी. पाकिस्तान दुनिया का इकलौता इस्लामिक परमाणु शक्ति वाला देश है और इजरायल इसे कभी सहजता से नहीं देखता.
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने हाल ही में कहा कि ईरान पर इजरायल का कब्जा होने पर इसका असर पाकिस्तान तक पहुंचेगा. भारत और अफगानिस्तान की मदद से इजरायल पाकिस्तान को कमजोर करने की कोशिश कर सकता है. इस्लामाबाद में खतरे की आहट सुनाई दे रही है, लेकिन यह कितना वास्तविक है?
इजरायल की पाकिस्तान को लेकर पुरानी चिंता
इजरायल ने कई बार खुलकर कहा है कि किसी मुस्लिम बहुल देश के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम इजरायल के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती माना जाता है. इजरायल का तर्क है कि अगर कोई इस्लामिक देश परमाणु ताकत बन जाता है, तो यह अन्य मुस्लिम देशों में भी फैल सकता है. हालांकि पाकिस्तान और इजरायल के बीच कोई सीधा सीमा विवाद नहीं है, फिर भी इजरायल पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को खतरे के रूप में देखता रहा है.
ईरान के बाद पाकिस्तान पर नजर?
दक्षिण एशिया के शोधकर्ता अल्ताफ परवेज ने अपने लेख में लिखा कि ईरान के बाद पाकिस्तान पर इजरायली हमले की बात अजीब लग सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता. संयुक्त राष्ट्र और इस्लामिक सहयोग संगठन की कमजोरी तथा भारत की इजरायल से मजबूत दोस्ती पाकिस्तान के लिए खतरा बढ़ाती है. पाकिस्तान का ईरान से लंबा बॉर्डर है. अगर ईरान में इजरायल समर्थक सरकार आई तो इसका सीधा असर इस्लामाबाद पर पड़ सकता है.
ग्रेटर इजरायल का सपना और चुनौती
इजरायल के कुछ रणनीतिकार 'ग्रेटर इजरायल' के विचार से प्रेरित हैं, जिसमें वे किसी मजबूत मुस्लिम देश को बाधा नहीं बनने देना चाहते. पाकिस्तान की तुर्की और सऊदी अरब के साथ बढ़ती सैन्य साझेदारी इजरायल के लिए बड़ी चिंता है. इजरायली विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में 'इस्लामिक नाटो' जैसा गठबंधन उनके खिलाफ खड़ा हो सकता है. ये साझेदारियां पाकिस्तान-इजरायल तनाव को और बढ़ा सकती हैं.
खतरा कितना गंभीर और वास्तविक
पाकिस्तान और इजरायल के बीच करीब 3000 किलोमीटर की दूरी है, इसलिए सीधा सैन्य टकराव आसान नहीं. लेकिन ईरान में बदलाव आने पर अप्रत्यक्ष खतरा बढ़ सकता है. पाकिस्तान के नेता और विशेषज्ञ मानते हैं कि इजरायल क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ने की रणनीति अपनाता है. फिलहाल कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन इस्लामाबाद में सतर्कता बढ़ गई है. पाकिस्तान अपनी परमाणु नीति और सैन्य तैयारियों पर पूरा ध्यान दे रहा है.
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