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पुराने पहरेदारों के आदेश से थक चुके Gen Z 'इट इज ओवर ', पाकिस्तान के Gen Z ने बताया देश का हाल

युवाओं के आवाजों को दबाया नहीं जा सकता, यह खुद के पाकिस्तानी युवा का मानना है. जेने जी के आर्टिकल ने पूरे पाकिस्तान में तहलका मचा दिया है.

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Edited By: Shanu Sharma
पुराने पहरेदारों के आदेश से थक चुके Gen Z  'इट इज ओवर ',  पाकिस्तान के Gen Z ने बताया देश का हाल
Courtesy: X (@FaizahUsa)

नई दिल्ली: पाकिस्तान के एक जेन-जी ने अपने ही देश की पोल खोलते हुए ऊंचे तख्तों पर बैठे अफसरों को चेतावनी दी है. हालांकि आलाकमानों को उनकी बातें अच्छी नहीं लगी और उन्होंने इस बात को मिटाने की पूर कोशिश की. लेकिन इंटरनेट की दुनिया में कहीं ना कहीं छाप छुट ही जाते है. 

दरअसरल, अमेरिका में रहने वाले एक पाकिस्तानी PhD स्टूडेंट जोरैन निजामानी ने अपने आर्टिकल,'इट इज ओवर' में अपने जेनरेशन के युवाओं के माइंडसेट और देश के हाल के बारे में बताया है. साथ ही उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की युवा पीढ़ी पुराने पहरेदारों से आदेश लेते-लेते थक चुकी है. 

राष्ट्रीय नायक का मिला दर्जा 

जोरैन निजामानी के इस आर्टिकल को 1 जनवरी को पाकिस्तानी दैनिक, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून समेत कई प्लेटफॉर्मों पर साझा किया गया, लेकिन अगले ही कुछ घंटों में पाकिस्तानी दबावों की वजह से इसे हटा दिया गया. हालांकि इस लेखक को लोगों ने 'राष्ट्रीय नायक' का दर्जा मिल गया. इस ऑप-एड को हटाए जाने का आदेश के बारे में कहा जाता है कि इसे  पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा दिया गया था. उनका कहना था कि यह ऑनलाइन आक्रोश पैदा कर रहा है. हालांकि ऑप-एड के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो. जोरैन निजामानी अभिनेता फ़ाज़िला काज़ी और कैसर खान के बेटे हैं. 

देशभक्ति कभी भी बेची नहीं जा सकती 

लिटिल रॉक में यूनिवर्सिटी ऑफ़ अर्कांसस से क्रिमिनोलॉजी में PhD कर रहे जोरैन निजामानी ने अपने ऑर्टिकल में यह तर्क दिया कि पाकिस्तान के सत्ताधारी अभिजात वर्गों का प्रभाव युवा पीढ़ियों पर नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए राज्य द्वारा प्रायोजित बार-बार होने वाले लेक्चर, सेमिनार और राज्य-संचालित अभियान अब प्रभावी नहीं रहे हैं. उन्होंने अपने आर्टिकल में लिखा कि सत्ता में बैठे बूढ़े पुरुषों और महिलाओं के लिए यह खत्म हो गया है.

युवा पीढ़ी आप जो कुछ भी उन्हें बेचने की कोशिश कर रहे हैं, उसे नहीं खरीद रही है. आप स्कूलों और कॉलेजों में देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए कितने भी भाषण और सेमिनार आयोजित कर लें, यह काम नहीं कर रहा है. सेना का नाम लिए बिना, निज़ामानी तर्क देते हैं कि देशभक्ति भाषणों या नारों से नहीं बनाई जा सकती, बल्कि यह स्वाभाविक रूप से तब बढ़ती है जब नागरिकों को समान अवसर, विश्वसनीय बुनियादी ढांचा, काम करने वाली प्रणालियां और गारंटीशुदा अधिकार दिए जाते हैं.

पाकिस्तान का बताया हाल

अपने आर्टिकल में उन्होंने मुख्य रूप से Gen Z और Gen Alpha की ओर से बातें लिखी है. उन्होंने लिखा कि युवाओं को पता है कि असल में क्या हो रहा है. देशभक्ति के नाम पर अपने विचारों को थोपने की कोशिश की जा रही है. इसके बावजूद उन्हें सबकुछ समझ आ रहा है. आप उन्हें यह बताने में नाकाम है कि उन्हें क्या सोचना है. वे खुद यह सारी बातें सोच सकते हैं हालांकि कहने में डरते हैं क्योंकि उन्हें अपनी सांसे प्यारी है.

उन्होंने लिखा कि युवा पीढ़ी परेशान हो चुकी है, लेकिन वे सत्ता को चुनौती नहीं दे सकते इसलिए देश छोड़ कर जाना पसंद कर रहे हैं. जाने वाले लोग पीछे मुड़कर इसलिए नहीं देखते क्योंकि उन्होंने देखा है कि जिन्होंने आवाज उठाई उन्हें कैसे चुप करा दिया गया. हालांकि इस आर्टिकल को हटा दिया गया है लेकिन इसके स्क्रीनशॉट काफी तेजी से वायरल हो रहे हैं.