नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक फैसलों से दुनिया का ध्यान खींचा है. उन्होंने आने वाले वर्षों के लिए अमेरिकी रक्षा बजट को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका भविष्य में किसी बड़ी जंग की तैयारी कर रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2027 के लिए अमेरिका के रक्षा बजट को लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है. यह मौजूदा रक्षा बजट की तुलना में काफी ज्यादा है. अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा सैन्य खर्च माना जाएगा. ट्रंप का कहना है कि दुनिया तेजी से अस्थिर हो रही है और अमेरिका को हर खतरे के लिए तैयार रहना होगा.
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि दुनिया इस समय मुश्किल और खतरनाक दौर से गुजर रही है. उन्होंने इशारों-इशारों में चीन, रूस और अन्य विरोधी देशों से मिलने वाली चुनौतियों की बात कही. उनके अनुसार मजबूत सेना ही अमेरिका की सुरक्षा और प्रभुत्व को बनाए रख सकती है.
हाल के दिनों में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों में तेजी देखने को मिली है. कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ी है, जिससे क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ा है. इसके अलावा कुछ देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत भी दिए गए हैं. इससे यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिका भविष्य में सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कुछ विवादास्पद बयानों और कदमों का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाना होगा. उनके प्रशासन का मानना है कि कमजोर नीति से दुश्मन देशों का हौसला बढ़ता है.
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़े हुए रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा आधुनिक हथियार प्रणालियों, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष बल पर खर्च किया जाएगा. इससे अमेरिका की सैन्य ताकत तकनीकी रूप से और मजबूत हो सकती है. ट्रंप का दावा है कि यह निवेश अमेरिका को भविष्य की लड़ाइयों के लिए पूरी तरह तैयार करेगा.
इस बड़े रक्षा बजट को लेकर अमेरिका की संसद यानी कांग्रेस में बहस तय मानी जा रही है. विपक्षी दलों का कहना है कि इतना ज्यादा सैन्य खर्च देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकता है. उनका मानना है कि इस पैसे का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में होना चाहिए.