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'कंगाल' पाकिस्तान का नया 'गटर कानून', मैनहोल का ढक्कन चुराने पर 10 साल की सजा; 50 लाख जुर्माना

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मैनहोल ढक्कन की चोरी पर अब 10 साल जेल और 50 लाख रुपये जुर्माना होगा. मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने मौतों को रोकने के लिए यह सख्त 'गटर कानून' लागू करने का ऐलान किया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान में अब गटर के ढक्कन चुराना किसी अपराधी को बहुत भारी पड़ सकता है. पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने चोरी की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए एक कड़े 'गटर कानून' की घोषणा की है. यह कदम उन जानलेवा हादसों के बाद उठाया गया है जहां खुले मैनहोल मासूमों की जान ले रहे हैं. मुख्यमंत्री ने चोरों और खरीदारों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को अब कड़ी सजा भुगतनी होगी.

मरियम नवाज द्वारा घोषित इस नए कानून के तहत ढक्कन चोरी करने, बेचने या खरीदने पर 1 से 10 साल तक की कैद हो सकती है. यदि किसी खुले सीवर की वजह से किसी नागरिक की जान जाती है, तो दोषी को 10 साल जेल के साथ 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का भारी जुर्माना भी देना होगा. मुख्यमंत्री ने एक वीडियो संदेश में अफसोस जताते हुए कहा कि प्रशासन सुबह ढक्कन लगाता है, लेकिन शाम होते-होते चोर उन्हें उखाड़कर ले जाते हैं.

हादसों का दर्दनाक सिलसिला 

इस कठोर दंड का तत्काल कारण लाहौर के डेटा दरबार इलाके में हुई एक हृदयविदारक घटना है. 29 जनवरी को वहां विकास कार्य के दौरान सादिया और उनकी नन्ही बेटी रिदा फातिमा एक खुले मैनहोल में गिर गईं, जिससे उनकी मृत्यु हो गई. इसी तरह सरगोधा शहर में भी एक मासूम बच्चा खुले नाले में गिर गया था, जिसे लोगों ने बड़ी मुश्किल से बचाया. इन लगातार होती दुर्घटनाओं ने सरकार को सुरक्षा नियमों को सख्त करने के लिए विवश कर दिया है.

चोरी का आर्थिक पहलू 

पाकिस्तान में गटर के ढक्कन चोरी होने का मुख्य कारण देश की जर्जर आर्थिक स्थिति है. प्राप्त जानकारी के अनुसार इन ढक्कनों में लोहे के छल्ले लगे होते हैं, जिनका वजन लगभग 30 किलोग्राम होता है. कबाड़ के बाजारों में इन लोहे के छल्लों को बेचकर चोरों को अच्छी खासी रकम मिल जाती है. लोग चंद रुपयों के लालच में दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं. गरीबी के कारण लोग सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाकर अपनी आजीविका चलाने की कोशिश कर रहे हैं.

गरीबी की भयावह स्थिति 

विश्व बैंक की 2025 की एक रिपोर्ट पाकिस्तान में गरीबी की डरावनी तस्वीर दिखाती है. देश की लगभग 45 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, जबकि 16.5 प्रतिशत लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे हैं. अनुमान है कि धीमी आर्थिक वृद्धि और जनसंख्या दबाव के चलते गरीबी के जाल में और लोग फंस सकते हैं. इसी हताशा और बेरोजगारी के कारण लोग चोरी जैसे अपराधों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो अब जानलेवा साबित हो रहे हैं.