आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान, चीन ने राहत देने से किया इनकार; मदद के लिए सऊदी पर टिकी नजर

पाकिस्तान का आर्थिक संकट और गहरा गया है. चीनी बिजली कंपनियों ने बकाया भुगतान पर राहत देने से इनकार कर दिया है. अब इस्लामाबाद सस्ती विदेशी फंडिंग जुटाकर महंगे कर्ज का बोझ कम करने की कोशिश कर रहा है.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पाकिस्तान की पहले से कमजोर आर्थिक स्थिति को एक और बड़ा झटका लगा है. चीन की बिजली कंपनियों ने बकाया भुगतान से जुड़े अनुबंधों में बदलाव और लेट पेमेंट सरचार्ज में राहत देने से इनकार कर दिया है. इससे इस्लामाबाद की ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी वित्तीय चुनौतियां और बढ़ गई हैं. सरकार अब महंगे कर्ज से राहत पाने के लिए नए विदेशी कर्ज की तलाश में जुटी है, ताकि बिजली क्षेत्र पर बढ़ते दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सके.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने चीन की बिजली कंपनियों से अनुबंध की कुछ शर्तों में बदलाव और करीब 170 अरब पाकिस्तानी रुपये के लेट पेमेंट सरचार्ज को माफ करने का अनुरोध किया था. हालांकि कंपनियों ने दोनों मांगों को अस्वीकार कर दिया. इससे पाकिस्तान के लिए ऊर्जा क्षेत्र का वित्तीय संकट और गहरा हो गया है.

बिजली परियोजनाओं पर बढ़ता बकाया

रिपोर्ट के अनुसार, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC के तहत स्थापित 18 बिजली संयंत्रों पर पाकिस्तान का लगभग 423 अरब पाकिस्तानी रुपये का भुगतान बकाया है. बताया जा रहा है कि यह स्थिति वर्ष 2015 के ऊर्जा समझौते के तहत किए गए वित्तीय वादों के अनुरूप नहीं मानी जा रही है.


10 अरब डॉलर की फंडिंग की तलाश

बढ़ते दबाव के बीच पाकिस्तान अब करीब 10 अरब डॉलर की कम ब्याज दर वाली विदेशी फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद ने सऊदी अरब समेत कुछ देशों से रियायती दर पर द्विपक्षीय कर्ज की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है. सरकार का मानना है कि इससे महंगे कर्ज का बोझ कम किया जा सकता है.

ऊर्जा क्षेत्र की मुश्किलें बरकरार

पाकिस्तान सरकार बिजली क्षेत्र के बढ़ते सर्कुलर डेट से निपटने के लिए 1.25 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये की बैंकिंग सुविधा को दोबारा शुरू करने पर भी विचार कर रही है. इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी मांगी जा रही है. सरकार का उद्देश्य बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति को स्थिर करना और उपभोक्ताओं पर बढ़ते बोझ को सीमित करना है.

आगे भी आसान नहीं होगी राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान संकट जल्द नहीं सुलझा, तो पाकिस्तान की ऊर्जा व्यवस्था और सार्वजनिक वित्त दोनों पर दबाव बढ़ सकता है. विदेशी निवेशकों का भरोसा बनाए रखना, बिजली क्षेत्र को टिकाऊ बनाना और बढ़ते कर्ज का प्रबंधन करना सरकार के सामने आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल रहेगा.