कंगाल पाकिस्तान ने कर्मचारियों को दिया जोरदार झटका, सैलरी में की 5 से 30% तक की कटौती; शरीफ सरकार का बड़ा फैसला

पाकिस्तान सरकार ने आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच सरकारी और स्वायत्त संस्थानों के कर्मचारियों की तनख्वाह में 5 से 30 प्रतिशत तक कटौती करने का फैसला किया है.

@hilalians8 x account
Km Jaya

नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया. शरीफ प्रशासन ने सरकारी और स्वायत्त संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में 5 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक की कटौती की है. यह फैसला प्रधानमंत्री शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान लिया गया.

यह कदम इस हफ्ते की शुरुआत में शुरू किए गए खर्च बचाने के उपायों की एक कड़ी का हिस्सा है, जिसे अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को देखते हुए उठाया गया है. प्रधानमंत्री शरीफ के दफ्तर से जारी एक बयान में बताया गया कि बैठक में ईंधन की घटती-बढ़ती कीमतों के असर और खर्चों में कटौती के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी समीक्षा की गई.

कहां होगा बचे हुए पैसे का इस्तेमाल?

शहबाज शरीफ सरकार ने कहा है कि इन उपायों से बचाए गए पैसों का इस्तेमाल जनता को राहत देने के लिए किया जाएगा. खर्च में कटौती की योजना के तहत शरीफ प्रशासन में कैबिनेट सदस्यों, मंत्रियों, सलाहकारों और विशेष सहायकों की अगले दो महीनों की सैलरी भी जनता की भलाई से जुड़ी योजनाओं में लगाई जाएगी. इसके अलावा, सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के विदेश दौरों पर लगा प्रतिबंध भी जारी रहेगा.

कैसी है वहां की स्थिति?

इससे यह संकेत मिलता है कि मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर पाकिस्तान पर भी पड़ रहा है, जैसा कि पिछले शुक्रवार को पेट्रोल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से साफ जाहिर होता है. इससे पहले पाकिस्तानी सरकार ने सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन के कोटे में 50 प्रतिशत की कटौती की थी और सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में चार दिन काम करने के आदेश जारी किए थे.

कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर, कई शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ गया है. जो लोग काम पर आने-जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या मोटरसाइकिलों पर निर्भर रहते हैं, उनके रोजमर्रा के खर्च भी बढ़ गए हैं. जैसे-जैसे ईद नजदीक आती है, आमतौर पर बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है. हालांकि बढ़ती महंगाई के कारण कई परिवारों की खरीदने की क्षमता कम होती जा रही है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पेशावर और कराची जैसे बड़े शहरों में भी साफ तौर पर देखा जा सकता है.