इफ्तार पार्टियों पर बैन, नेताओं की सैलरी कट; तेल संकट से निपटने के लिए शहबाज सरकार ने उठए सख्त कदम

बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा संकट के बीच पाकिस्तान सरकार ने सख्त मितव्ययिता योजना लागू की है. इफ्तार पार्टियों पर रोक, सरकारी खर्च में कटौती और अधिकारियों के वेतन में कमी जैसे कदम उठाए गए हैं.

ani
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती तेल कीमतों के बीच पाकिस्तान सरकार ने देश की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए कड़े कदम उठाने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कई मितव्ययिता उपायों की घोषणा की है.

इनमें सरकारी दावतों और इफ्तार पार्टियों पर रोक, मंत्रियों और सांसदों के वेतन में कटौती तथा सरकारी खर्च कम करने जैसे फैसले शामिल हैं. सरकार का कहना है कि यह कदम ईंधन बचाने और बढ़ते आर्थिक दबाव से निपटने के लिए जरूरी हैं.

इफ्तार पार्टियों और सरकारी दावतों पर रोक

सरकार ने सभी आधिकारिक दावतों और इफ्तार समारोहों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इसके साथ ही निर्देश दिया गया है कि सरकारी सेमिनार और बैठकें अब होटलों में आयोजित करने के बजाय सरकारी भवनों में ही होंगी. सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक खर्च और ईंधन की खपत दोनों कम होंगी. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है.

वेतन और भत्तों में बड़ी कटौती

मितव्ययिता योजना के तहत संघीय और प्रांतीय मंत्रिमंडल के सदस्य दो महीने तक अपना वेतन और भत्ते नहीं लेंगे. इसके अलावा सांसदों के वेतन में भी दो महीने के लिए 25 प्रतिशत की कटौती की गई है. वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से भी सार्वजनिक हित के लिए दो दिन के वेतन का योगदान देने की अपील की गई है, हालांकि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है.

सरकारी वाहनों और खर्च पर नियंत्रण

सरकार ने ईंधन बचाने के लिए आधिकारिक वाहनों के उपयोग पर भी कड़ी सीमा तय की है. अगले दो महीनों के लिए सरकारी वाहनों के ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी और लगभग 60 प्रतिशत वाहनों को अस्थायी रूप से खड़ा रखा जाएगा. एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन जैसे जरूरी वाहनों को इस नियम से बाहर रखा गया है. इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों में नए वाहन, फर्नीचर या उपकरण खरीदने पर भी रोक लगा दी गई है.

ऊर्जा बचत के लिए नए कदम

ऊर्जा खपत कम करने के लिए सरकार ने कई अतिरिक्त उपाय भी घोषित किए हैं. सरकारी कार्यालय अब सप्ताह में चार दिन ही खुलेंगे और आधे कर्मचारी घर से काम करेंगे. उच्च शिक्षा संस्थानों को कुछ समय के लिए ऑनलाइन कक्षाएं चलाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रधानमंत्री शरीफ ने तेल की जमाखोरी करने वालों को सख्त चेतावनी भी दी और कहा कि संकट का फायदा उठाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.