' ईद पर कोई जंग नहीं....', कब तक एक दूसरे पर गोले नहीं दागेंगे पाकिस्तान-अफगानिस्तान? सीजफायर की घोषणा
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फितर के मौके पर अस्थायी सीजफायर की घोषणा की है. यह विराम 18-19 मार्च की मध्यरात्रि से 23-24 मार्च की मध्यरात्रि तक चलेगा.
नई दिल्ली: पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर आई है. ईद-उल-फितर के पवित्र अवसर पर दोनों देशों ने अस्थायी रूप से लड़ाई रोकने का फैसला किया है. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सबसे पहले इसकी घोषणा की, जिसके कुछ घंटों बाद अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भी सहमति जताई. यह कदम सऊदी अरब, तुर्किये और कतर जैसे इस्लामी देशों के अनुरोध पर उठाया गया है. हाल के दिनों में सीमा पार हमलों से स्थिति काफी गर्म हो गई थी, लेकिन अब ईद की खुशियां बिना हिंसा के मनाने की उम्मीद जगी है.
सीजफायर की समयसीमा और शर्तें
यह अस्थायी विराम 18-19 मार्च की मध्यरात्रि से शुरू होकर 23-24 मार्च की मध्यरात्रि तक रहेगा. पाकिस्तान ने इसे अपनी पहल बताया और कहा कि यह 'गजब-लिल-हक' अभियान के बीच लिया गया फैसला है. दोनों पक्षों ने साफ किया कि अगर सीमा पार से कोई हमला, ड्रोन अटैक या आतंकी घटना हुई तो तुरंत कार्रवाई फिर शुरू हो जाएगी. अफगानिस्तान ने भी कहा कि किसी खतरे पर बहादुरी से जवाब दिया जाएगा. यह रोक सिर्फ ईद के लिए है, स्थायी शांति की कोई गारंटी नहीं.
काबुल अस्पताल पर हमले का विवाद
सोमवार को काबुल के ओमिद अस्पताल पर हुए हवाई हमले ने तनाव चरम पर पहुंचा दिया. अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान के हमलों में 408 लोग मारे गए और 265 घायल हुए. अस्पताल में नशामुक्ति के मरीज थे. पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि निशाना सैन्य ठिकाने थे, नागरिक नहीं. अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि हमले में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई.
सामूहिक अंतिम संस्कार और गुस्सा
हमले के बाद काबुल में मारे गए लोगों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया गया. बुलडोजर से कब्रें खोदी गईं और पीड़ितों को एक साथ दफनाया गया. स्थानीय लोग और अधिकारी गुस्से में हैं. अफगानिस्तान ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया. पाकिस्तान का कहना है कि उसके हमले आतंकी ठिकानों पर थे और मौतों के दावे दुष्प्रचार हैं. दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जिससे सीजफायर की सार्थकता पर सवाल उठ रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCHR) ने काबुल हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की है. प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने कहा कि घटना की तुरंत, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए. दोषियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाए. जांच के नतीजे सार्वजनिक हों और पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिले. यूएन ने चिंता जताई कि यह संघर्ष और बढ़ सकता है, इसलिए शांति की अपील की.
भविष्य की उम्मीदें
यह सीजफायर ईद की खुशियां लौटाने की कोशिश है, लेकिन गहरे मुद्दे जैसे सीमा विवाद और आतंकी गतिविधियां बरकरार हैं. दोनों देशों ने अच्छे इरादे दिखाए हैं, लेकिन अगर कोई छोटी घटना हुई तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय उम्मीद कर रहा है कि यह विराम बातचीत की शुरुआत बने. ईद के बाद क्या होगा, यह देखना बाकी है, लेकिन फिलहाल दोनों तरफ राहत की सांस है.
और पढ़ें
- 'जान देकर चुकानी पड़ेगी कीमत...', ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खाई अली लारिजानी की मौत का बदला लेने की कसम
- डॉक्टरों, नर्सों को 100,000 डॉलर की H-1B वीजा फीस से मिल सकती है राहत, अमेरिकी संसद में पेश हुआ बिल
- ऊर्जा कीमतों को काबू करने के लिए ट्रंप का बड़ा फैसला, जोन्स एक्ट में दी 60 दिनों की छूट