‘मेरे रहते फिलिस्तीन नहीं बनेगा’, नेतन्याहू के बयान से ट्रंप की गाजा शांति योजना पर गहराया संकट

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी राज्य की संभावना खारिज कर दी है. उन्होंने हमास के पूरी तरह निहत्थे होने तक गाजा से सेना हटाने से भी इनकार किया.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: गाजा युद्ध खत्म करने की अमेरिकी कोशिशों को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान से बड़ा झटका लगा है. नेतन्याहू ने साफ कहा है कि उनके प्रधानमंत्री रहते गाजा या वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15 सूत्रीय शांति योजना को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया. साथ ही कहा कि हमास के पूरी तरह निहत्थे होने तक इजरायली सेना गाजा से वापस नहीं जाएगी. इससे शांति समझौते की राह फिर मुश्किल होती दिख रही है.

इजरायली मीडिया के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, गाजा या वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण से पहले इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी. यह रुख ट्रंप के उस दावे से अलग नजर आ रहा है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी योजना को युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता बताया था.

हमास ने भी रखी अपनी शर्त

हमास ने भी प्रस्ताव को लेकर तत्काल हथियार डालने पर सहमति नहीं जताई है. संगठन का कहना है कि पहले इजरायल को हमले रोकने होंगे और पहले हुए संघर्षविराम समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा. हमास के वरिष्ठ अधिकारी गाजी हमद ने कहा कि इजरायल को पहले हमले बंद करने, अपनी सेना पीछे हटाने और गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाना होगा.


क्या है ट्रंप की 15 सूत्रीय योजना?

ट्रंप की योजना में युद्ध समाप्त करने, हथियारबंद संगठनों को निहत्था करने और इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी का प्रस्ताव है. इसके तहत गाजा का प्रशासन एक फिलिस्तीनी तकनीकी समिति को सौंपने की बात है. योजना में हथियारों, सुरंगों और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण तथा अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती का भी प्रस्ताव रखा गया है. इसके बाद पुनर्निर्माण और राजनीतिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है.

आठ देशों ने जताई चिंता

इजरायल के सैन्य अभियान को लेकर आठ देशों ने भी चिंता जताई है. संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र ने संयुक्त बयान जारी किया. इन देशों ने कहा कि गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई अमेरिकी योजना को आगे बढ़ाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे राजनीतिक प्रक्रिया पटरी से उतरने, तनाव बढ़ने और मानवीय संकट गहराने का खतरा है.

शांति योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती

मौजूदा स्थिति में दोनों पक्षों की शर्तें एक-दूसरे से टकराती नजर आ रही हैं. इजरायल पहले हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण की मांग कर रहा है, जबकि हमास पहले इजरायली हमले रोकने और सेना पीछे हटाने पर जोर दे रहा है. ऐसे में ट्रंप की योजना को जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा. इजरायल और हमास के बीच इन बुनियादी मतभेदों का समाधान ही आगे की शांति प्रक्रिया की दिशा तय करेगा.