चाय का छोटा सा ब्रेक बना वरदान, नेपाल की भीषण बाढ़ से बच गई 28 कैलाश मानसरोवर श्रद्धालुओं की जान
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच चाय का एक छोटा सा ब्रेक और वीजा में हुई देरी 28 कैलाश मानसरोवर श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित हुई और उनकी जान बच गई.
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के बीच विशाखापत्तनम के 28 कैलाश मानसरोवर श्रद्धालुओं की जान बाल-बाल बच गई. काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद श्रद्धालुओं की बस चाय पीने के लिए रुकी. इस छोटे से ब्रेक के दौरान ही उनसे आधा घंटा पहले निकली दो बसें अचानक आई तेज बाढ़ में बह गईं. श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे ऐसे भयानक हादसे के इतने करीब होंगे.
वीजा में देरी बनी सुरक्षा कवच
डीएलडीए के अध्यक्ष गाडू वेंकटप्पा के अनुसार, चीन से वीजा मिलने में हुई तीन दिनों की देरी ने भी अनजाने में उन्हें भयानक त्रासदी से बचा लिया. मूल योजना के तहत उन्हें पहले ही यात्रा शुरू करनी थी, लेकिन वीजा में देरी और दिल्ली से आने वाले सदस्यों की फ्लाइट का समय बदलने के कारण वे सुबह 3 बजे की बजाय 6 बजे काठमांडू से रवाना हुए. यदि वे सुबह 3 बजे निकलते तो वे उसी समय भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित इलाके में मौजूद होते.
ड्राइवर की सूझबूझ और बड़ा हादसा टला
चीन सीमा पुल के पास पहुंचते ही अचानक भारी भूस्खलन होने लगा. तभी सामने से आ रहे एक टेम्पो चालक ने चिल्लाकर खतरे की चेतावनी दी. चेतावनी सुनते ही बस चालक ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और गाड़ी को यू-टर्न लेकर सुरक्षित ऊंचे इलाके की तरफ मोड़ दिया. इस त्वरित फैसले से बस में सवार सभी 28 यात्री सुरक्षित बच गए और थोड़ी देर बाद परिजनों को अपने ठीक होने की सूचना दी.
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भारत सरकार का राहत और बचाव अभियान
नेपाल के भोटे कोशी और त्रिशूली नदी इलाकों में आई आपदा के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) लगातार बचाव कार्य में जुटा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. इसके अलावा, चीन सीमा से 149 भारतीय नेपाल में सुरक्षित प्रवेश कर चुके हैं और लगभग 400 नागरिक चीन की तरफ सुरक्षित हैं. सरकार बाकी फंसे लोगों से संपर्क साधने का प्रयास कर रही है.