नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से हाहाकार, मृतकों की संख्या पहुंची 1050; 4 हजार लोग अब भी लापता

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. सुरक्षाबलों ने मंगलवार को आठ जिलों से कई और शव बरामद किए, जिसके बाद बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,050 हो गई है.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. सुरक्षाबलों ने मंगलवार को आठ जिलों से कई और शव बरामद किए, जिसके बाद बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,050 हो गई है. अधिकारियों के मुताबिक, करीब 4000 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि लगभग 12,000 लोगों को अब तक सुरक्षित बचाया जा चुका है.

लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश और कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण राहत और बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं. प्रशासन ने कई संवेदनशील इलाकों के लिए बाढ़ का नया अलर्ट भी जारी किया है.

26 अगस्त को आई अचानक बाढ़:

यह तबाही 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के बाद शुरू हुई. इसके कारण अचानक बाढ़ आई और उत्तरी तथा मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों में पानी भर गया. हिमालयी इलाके से बहने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने से घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए. कई पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है.


चितवन में मिले सबसे ज्यादा शव:

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, चितवन जिले में सबसे ज्यादा 321 शव बरामद किए गए हैं. इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 216, नवलपरासी वेस्ट में 170, नुवाकोट में 142, गोरखा में 65, धादिंग में 57, रसुवा में 41 और तनहुन में 38 शव मिले हैं. अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं. कई परिवार अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार, 21 अस्पतालों में अज्ञात शव रखे गए हैं.

शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती:

बाढ़ के कारण बरामद कई शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं. कुछ मामलों में केवल शरीर के हिस्से ही मिल पाए हैं. यही वजह है कि शवों की पहचान करना बचाव दल और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. अब तक पहचान के बाद केवल 60 शव परिजनों को सौंपे गए हैं, जबकि करीब 700 शवों को जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड तैयार करने के बाद दफना दिया गया है.

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश:

बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े 683 कर्मचारियों और कामगारों की तलाश की जा रही है. आशंका है कि इनमें से कई लोग सुरंगों के अंदर फंसे हो सकते हैं. भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल के बचाव दल की मदद कर रही हैं. भारत की विशेष सुरंग बचाव टीम ने चिलिमे में एक सुरंग के अंदर पहुंचकर अभियान शुरू किया है, जबकि लांगटांग में भी सुरंग की जांच की जा रही है.

कई जिलों में फिर बाढ़ का अलर्ट:

नेपाल के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों के कई जिलों में फिर से बाढ़ का खतरा बताया गया है. नुवाकोट और रसुवा में अचानक बाढ़ की आशंका सबसे ज्यादा है. इसके अलावा काठमांडू, भक्तपुर, ललितपुर, धादिंग, सिंधुपालचोक और कई अन्य जिलों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी गई है.

21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात:

नेपाल सरकार ने राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए 21,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है. फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है. बाढ़ में कई सड़कें और 19 पुल बह गए हैं. नेपाल-चीन के बीच प्रमुख व्यापार मार्ग भी प्रभावित हुआ है. यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए काठमांडू और हेटौडा के बीच कुछ मार्गों पर एकतरफा यातायात लागू किया गया है.