अमेरिका का चाबहार पोर्ट पर मिसाइल हमला, भारत के रणनीतिक निवेश पर मंडराया संकट

अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार पोर्ट पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है. इस हमले के बाद भारत के लंबे समय से चले आ रहे निवेश और क्षेत्रीय व्यापारिक गलियारे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. दूसरी ओर ईरान ने पलटवार का दावा करते हुए खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है.

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Shanu Sharma

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और अधिक गंभीर होता नजर आ रहा है. अमेरिका ने ईरान के दक्षिण पूर्वी तट पर स्थित रणनीतिक चाबहार पोर्ट पर कम से कम तीन मिसाइलें दागने का दावा किया है. इसे लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री ने एक वीडियो भी शेयर किया है.

ईरानी मीडिया ने भी चाबहार क्षेत्र पर हमलों की पुष्टि की है, लेकिन निगरानी टावर पूरी तरह ढहने के अमेरिकी दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है. इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है.

छठी रात भी जारी रही अमेरिकी बमबारी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से लगातार छठी रात भी हवाई हमले किए गए. ईरानी मीडिया के मुताबिक अमेरिका द्वारा किए गए  ताजा हमलों में कम से कम 8 लोगों की मौत हुई है, जबकि दो दर्जन लोग बुरी तरह घायल हैं.


ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 22 जून से शुरू हुए नए सैन्य अभियान के बाद अब तक मरने वालों की संख्या 38 तक पहुंच चुकी है, जबकि 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं. लगातार हो रहे हमलों से कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है.

पुल, हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन भी बने निशाना

ईरान की स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी हमलों में केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है. होर्मोजगान प्रांत में छह पुलों पर हमले किए गए हैं. इसके अलावा बंदर अब्बास हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित दो पुल भी हमलों की चपेट में आए हैं. बुशहर शहर, जहां ईरान का एकमात्र नागरिक परमाणु बिजली संयंत्र स्थित है, वहां भी दो तेज धमाकों की खबर सामने आई है.

इन घटनाओं के बाद पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है. चाबहार पोर्ट ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल है. यह बंदरगाह इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा माना जाता है, जिसके जरिये भारत की मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक पहुंच आसान हो सकती है.