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अब 'सुपर पावर' की रक्षा करेगा यूक्रेन? ईरान से तनाव के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भेजे एक्सपर्ट? जानिए क्या है पूरा मामला

राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेन ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन और ड्रोन ऑपरेशन में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम रवाना की है.

Anuj

नई दिल्ली: दुनिया की राजनीति और युद्ध के समीकरण समय के साथ कैसे बदलते हैं, इसका ताजा उदाहरण यूक्रेन और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग है. कभी रूस के खिलाफ अमेरिका से समर्थन मांगने वाला यूक्रेन अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर मदद करता नजर आ रहा है. यूक्रेन ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों की रक्षा के लिए ड्रोन विशेषज्ञों और इंटरसेप्टर ड्रोन की एक विशेष टीम भेजी है.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका ने हाल ही में सुरक्षा सहायता के लिए अनुरोध किया था. उन्होंने बताया कि जैसे ही अमेरिका की ओर से मदद मांगी गई, यूक्रेन ने तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और अपने विशेषज्ञों को भेजने का फैसला किया.

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने क्या कहा?

राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेन ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन और ड्रोन ऑपरेशन में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम रवाना की है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी अनुरोध मिलने के अगले ही दिन यह टीम मिशन के लिए रवाना हो गई. हालांकि, इस मुद्दे पर व्हाइट हाउस की ओर से आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अमेरिका ने यूक्रेन से औपचारिक मदद मांगी थी या नहीं. फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग के रूप में देखा जा रहा है.

एक्सपर्ट की राय?

पिछले कुछ वर्षों से रूस-यूक्रेन युद्ध में ईरान के डिजाइन वाले हमलावर ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है. रूस ने इन ड्रोनों का उपयोग यूक्रेन के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमलों के लिए किया. ऐसे में यूक्रेन को इन ड्रोनों से निपटने का काफी अनुभव हासिल हो चुका है. इसी अनुभव का उपयोग करते हुए यूक्रेन अब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को भी ऐसे हमलों से बचाने में मदद करना चाहता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन की यह विशेषज्ञता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

'सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं'

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यूक्रेन की यह पहल केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है. इसके पीछे कूटनीतिक रणनीति भी है. यूक्रेन चाहता है कि अमेरिका के साथ उसके संबंध और मजबूत हो, खासकर उस समय जब रूस के साथ चल रहे युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान कुछ हद तक पश्चिम एशिया की ओर शिफ्ट हो रहा है. 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि रूस के साथ शांति समझौते की राह में उन्हें यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बड़ी बाधा लगते हैं. ऐसे में यूक्रेन अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाकर अपनी सकारात्मक छवि पेश करना चाहता है.

रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा है. उनका दावा है कि रूस ने ईरान को कई तरह की खुफिया जानकारी दी है, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों की उपग्रह तस्वीरें भी शामिल हैं. वहीं, जेलेंस्की का कहना है कि उन्हें ऐसी जानकारी भी मिली है जिससे पता चलता है कि ईरान से उड़ाए जाने वाले कुछ ड्रोन में रूसी तकनीक और पुर्जों का इस्तेमाल किया गया है.

ड्रोन सिस्टम उपलब्ध कराने की पेशकश

यूक्रेन ने पश्चिम एशिया के देशों को भी अपने ड्रोन सिस्टम उपलब्ध कराने की पेशकश की है. इसके बदले वह रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए अधिक उन्नत रक्षा प्रणाली हासिल करना चाहता है. इसके साथ ही यूक्रेन ने यह भी कहा है कि वह उन देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है जिनके रूस के साथ मजबूत संबंध हैं, ताकि वे रूस पर युद्धविराम के लिए दबाव बना सके.