ट्रंप की चेतावनी भी नेतन्याहू पर बेअसर, युद्धविराम के कुछ घंटे बाद लेबनान पर इजरायल का हमला; पांच की मौत
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने के कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी लेबनान में नए हवाई और ड्रोन हमले हुए. इन हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई.
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें उस समय झटका खा गईं, जब इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने के कुछ घंटों बाद ही दक्षिणी लेबनान में नए हमले हुए हैं. शनिवार को हुए हवाई और ड्रोन हमलों में कम से कम पांच लोगों की जान चली गई. इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में हालात फिर से बिगड़ने की आशंका बढ़ा दी है. युद्धविराम के बाद स्थानीय लोगों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन रातभर चली सैन्य गतिविधियों ने चिंता बढ़ा दी.
लेबनानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और कुछ रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा. इससे लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है. हालात देखकर लग रहा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी का भी इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू पर कोई असर नहीं पड़ा है.
घातक हमले
दक्षिणी लेबनान में एक बेहद घातक रात के बाद ये ताजा हमले हुए. इससे पहले नबातीह जिले में हुए हमलों में कथित तौर पर कम से कम 16 लोग मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हो गए और कुछ मलबे के नीचे दबे हुए लापता हैं.
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लेबनानी मीडिया ने इस बमबारी को हाल के महीनों में इस क्षेत्र में देखी गई सबसे भीषण सैन्य कार्रवाइयों में से एक बताया. कई कस्बों और रिहायशी इलाकों पर हवाई हमले और तोपखाने से गोलाबारी हुई.
मृतकों में नबातीह, हारूफ, कफर सिर और आसपास के अन्य इलाकों के निवासी शामिल थे. एक अलग ड्रोन हमले में मोटरसाइकिल को निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया.
अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के माध्यम से युद्धविराम
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे से कुछ ही समय पहले युद्धविराम लागू हो गया. बताया जाता है कि यह समझौता अमेरिका, कतर और ईरान के राजनयिक प्रयासों के माध्यम से हुआ. वार्ता में शामिल अधिकारियों ने कहा कि इसका उद्देश्य लेबनान की दक्षिणी सीमा पर तनाव को और बढ़ने से रोकना और मध्य पूर्व में चल रही व्यापक राजनयिक पहलों का समर्थन करना था.
खबरों के मुताबिक, यह समझौता सिर्फ शत्रुता समाप्त करने तक ही सीमित नहीं है. इसमें ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील देने के कदम भी शामिल हैं, वहीं ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षणों में सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है.
इस समझौते में आर्थिक सहयोग को बेहतर बनाने, पुनर्निर्माण प्रयासों का समर्थन करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय व्यापार मार्गों को बहाल करने के उद्देश्य से बनाई गई योजनाएं भी शामिल हैं.