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11 देशों ने किया मिडिल ईस्ट में तबाह हुए मुल्कों की मदद का ऐलान, IMF और वर्ल्ड बैंक से लगाई ये गुहार

मध्य-पूर्व में जंग से हुए नुकसान के बीच 11 देशों ने IMF और विश्व बैंक से समन्वित आर्थिक मदद की मांग की है. वहीं ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर 58 अरब डॉलर तक खर्च का अनुमान लगाया गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मध्य-पूर्व के प्रभावित देशों की मदद के लिए वैश्विक स्तर पर पहल तेज हो गई है. ब्रिटेन और जापान सहित 11 देशों के वित्त मंत्रियों ने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से आपातकालीन आर्थिक सहायता देने की अपील की है. इन देशों का कहना है कि सहायता जरूरत के अनुसार और लचीले तरीके से दी जानी चाहिए, ताकि प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं को जल्द संभाला जा सके.

संयुक्त बयान में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष फिर भड़कता है या होर्मुज समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर पड़ेगा. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और दुनिया की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी नुकसान

ऊर्जा रिसर्च कंपनी Rystad Energy के मुताबिक, युद्ध के कारण मध्य-पूर्व को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ऊर्जा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर करीब 58 अरब डॉलर तक खर्च हो सकता है. इसमें से लगभग 50 अरब डॉलर तेल और गैस सुविधाओं पर ही खर्च होने की संभावना है.

मरम्मत का सीमित असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यह खर्च केवल नुकसान की भरपाई करेगा, इससे नई उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ेगी. Rystad के वरिष्ठ विश्लेषक करण सतवानी के अनुसार, मरम्मत के चलते अन्य प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं और लागत बढ़ सकती है. इसका असर केवल मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा निवेश की समयसीमा पर भी पड़ेगा.

अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगा खर्च

रिपोर्ट के अनुसार, कुल मरम्मत खर्च औसतन 46 अरब डॉलर के आसपास रह सकता है. डाउनस्ट्रीम रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. इसके अलावा बिजली, औद्योगिक इकाइयों और विलवणीकरण संयंत्रों की मरम्मत पर 3 से 8 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है.