बांग्लादेश में खसरे का कहर, 300 से ज्यादा बच्चों की मौत; वैक्सीन की कमी और राजनीति बनी मासूमों की दुश्मन?

बांग्लादेश में खसरा महामारी का रूप ले चुका है, जिससे अब तक 300 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है. टीकाकरण अभियानों में देरी, वैक्सीन की किल्लत और हालिया राजनीतिक उथल-पुथल ने इस स्वास्थ्य संकट को और भी भयावह बना दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय हाल के इतिहास के सबसे भीषण खसरा (Measles) प्रकोप से जूझ रहा है. स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या 300 के पार पहुंच गई है. गुरुवार सुबह तक के पिछले 24 घंटों में ही 12 और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है. हालांकि, इनमें से एक मौत आधिकारिक तौर पर खसरे से जुड़ी बताई गई है, जबकि बाकी 11 मौतें संदिग्ध मामलों की श्रेणी में रखी गई हैं.

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि संदिग्ध मौतों में राजधानी ढाका सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है, जहां अकेले पांच बच्चों ने दम तोड़ा. 15 मार्च से अब तक खसरे से पुष्ट मौतों की संख्या 57 हो गई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा 279 तक जा पहुंचा है. संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अवधि में 1,238 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल मामलों की संख्या 45,498 हो गई है.

टीकाकरण अभियान और नौ महीने का पेंच 

बांग्लादेश में आमतौर पर बच्चों को नौ महीने की उम्र से खसरे का टीका लगाया जाता है. स्वास्थ्य विभाग के उप निदेशक शहरयार सज्जाद ने बीबीसी को बताया कि इस प्रकोप में संक्रमित होने वाले बच्चों में से लगभग एक-तिहाई नौ महीने से भी कम उम्र के थे. देश में हर चार साल में विशेष टीकाकरण अभियान चलाने की परंपरा रही है, लेकिन 2020 के बाद से कोविड-19 और राजनीतिक उथल-पुथल के कारण यह प्रक्रिया बुरी तरह बाधित हुई है. इस साल अप्रैल में प्रस्तावित अभियान भी प्रशासनिक कारणों से नहीं हो सका.

राजनीतिक उथल-पुथल का स्वास्थ्य पर असर 

शेख हसीना की सरकार हटने के बाद देश में फैली राजनीतिक अशांति को भी इस संकट का एक बड़ा कारण माना जा रहा है. सज्जाद के अनुसार, अप्रैल में नियोजित अभियान का न होना एक बड़ी चूक साबित हुई. इसके अलावा, देश में टीकों की भारी कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं. जानकारों का कहना है कि अंतरिम सरकार के तहत नई वैक्सीन खरीद प्रणाली के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिससे समय पर वैक्सीन नहीं मिल सकी.

आपातकालीन अभियान और भविष्य की चुनौती 

पिछले महीने, जब मरने वालों का आंकड़ा 100 को पार कर गया था, तब बांग्लादेश ने एक आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया था. हालांकि, संक्रमण की व्यापकता को देखते हुए यह प्रयास नाकाफी लग रहे हैं. वर्तमान प्रकोप को बांग्लादेश के इतिहास के सबसे घातक स्वास्थ्य संकटों में से एक माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैक्सीन की खरीद प्रणाली को दुरुस्त नहीं किया जाता और व्यापक टीकाकरण अभियान नहीं चलाया जाता, तब तक इस महामारी पर काबू पाना मुश्किल होगा.