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ईरान में खामेनेई की मौत के 40 दिन पूरे होने पर सड़कों पर उतरा जनसैलाब, जानें सीजफायर के बीच कैसा है वहां का माहौल

ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 40 दिन पूरे होने पर देशभर में भारी भीड़ सड़कों पर उतरी. शोक और शांति की उम्मीद के बीच माहौल संवेदनशील बना हुआ है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. इस बीच गुरुवार को ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश भर के सैकड़ों शहरों की सड़कों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. यह अवसर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खमेनेई और अन्य सैन्य अधिकारियों के निधन के 40 दिन पूरे होने का प्रतीक था.

रिपोर्ट के अनुसार ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने तेहरान के रिपब्लिक स्क्वायर में आयोजित एक विशाल स्मारक समारोह में भाग लिया. वहां से एक भव्य जुलूस निकला, जो ठीक उसी स्थान की ओर बढ़ा जहां पूर्व सर्वोच्च नेता ने अमेरिका-इजरायल के हमलों के दौरान अपनी जान गंवाई थी. पूरे देश में लोग शोक मना रहे हैं, नारे लगा रहे हैं और अपने सर्वोच्च नेता के आदर्शों के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ ले रहे हैं. 

कब हुई थी मौत?

अयातुल्ला खमेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को हुई थी. ठीक उसी दिन जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने सैन्य हमले शुरू किए थे. जिस दौरान उनके परिवार के सदस्य भी मारे गए थे. इन हमलों में कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की जान चली गई, जिनमें मेजर जनरल अब्दुलरहीम मौसवी और रियर एडमिरल अली शमखानी शामिल थे. 

सबसे दुखद घटना मिनाब के एक प्राथमिक विद्यालय में हुई, जहां हमले के वजह से 170 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें से अधिकांश छोटे बच्चे थे. इन हमलों से नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा. 

ईरानी सेना ने कैसे दिया करारा जवाब?

इन हमलों के बाद ईरानी सेना ने एक जोरदार जवाबी हमला किया, जिसमें उसने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी. इस भीषण सैन्य टकराव के बाद सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल यानी SNSC ने पुष्टि की कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से 14 दिन का सीजफायर लागू हो गया है. ईरान का दावा है कि यह शांति समझौता तब हुआ जब अमेरिका ने तेहरान के 10-सूत्री प्रस्ताव को मान लिया.

इस सीजफायर के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने एक अहम बयान जारी किया है. IRGC का कहना है कि अयातुल्ला खामेनेई का निधन भी इस्लामिक क्रांति को आगे बढ़ाने में उतना ही अहम है, जितना कि उनका जीवन भर मौजूद रहना था. सेना ने साफ किया है कि दिवंगत नेता का विजन जो प्रतिरोध, आजादी और न्याय पर आधारित था. आज भी देश के शासन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है.