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हिजाब को लेकर बगावत पर फूटा खामेनेई का गुस्सा, ड्रेस कोड का किया बचाव

बुधवार को एक्स पर कई पोस्टों में, ख़ामेनेई ने साफ़ शब्दों में कहा कि महिलाओं के अधिकारों का इस्लामी संस्करण, जिसमें अनिवार्य हिजाब कानून, लैंगिक भेदभाव और ड्रेस कोड उल्लंघन पर कड़ी सज़ा शामिल है.

Gyanendra Sharma
हिजाब को लेकर बगावत पर फूटा खामेनेई का गुस्सा, ड्रेस कोड का किया बचाव
Courtesy: Photo-Social Media

तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश के ड्रेस कोड का बचाव किया है और अमेरिका तथा पश्चिमी पूंजीवाद पर महिलाओं की गरिमा को नष्ट करने का आरोप लगाया है. उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब बढ़ती संख्या में ईरानी महिलाएं इस्लामी गणराज्य के सख्त ड्रेस कोड का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं. 

बुधवार को एक्स पर कई पोस्टों में, ख़ामेनेई ने साफ़ शब्दों में कहा कि "महिलाओं के अधिकारों" का इस्लामी संस्करण, जिसमें अनिवार्य हिजाब कानून, लैंगिक भेदभाव और ड्रेस कोड उल्लंघन पर कड़ी सज़ा शामिल है, नैतिक रूप से पश्चिमी देशों से बेहतर है. यह उद्दंड उपदेश ऐसे समय में आया है जब तेहरान को महिलाओं और लड़कियों पर अपनी क्रूर कार्रवाई के लिए दुनिया भर में लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

खामेनेई का कहना है कि पश्चिमी पूंजीवाद महिलाओं की गरिमा को कुचल रहा है

खामेनेई ने तर्क दिया कि किसी भी समाज का पहला दायित्व "सामाजिक व्यवहार में न्याय और परिवार के भीतर न्याय" सुनिश्चित करना है, तथा उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारों को महिलाओं की "सुरक्षा, गरिमा और सम्मान" की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी पूंजीवादी व्यवस्थाएं महिलाओं को एक वस्तु मात्र बना देती हैं और उनकी बुनियादी गरिमा को नष्ट कर देती हैं. 

पश्चिम देश महिलाओं को भोग का वस्तु समझते हैं

उन्होंने लिखा, "दुष्ट पूंजीवादी तर्क महिलाओं की गरिमा को कुचलता और नष्ट करता है." उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम में महिलाओं का इस्तेमाल "भौतिक शोषण" के लिए किया जाता है और उन्हें समान काम के लिए पुरुषों से कम वेतन दिया जाता है. अपने पोस्ट में खामेनेई ने पश्चिमी मानदंडों के विरुद्ध इस्लाम में महिलाओं के प्रति "सम्मान" को खड़ा किया तथा कहा कि इस्लाम में महिलाओं को "स्वतंत्रता, आगे बढ़ने और प्रगति करने की क्षमता तथा पहचान" प्राप्त है, जबकि पूंजीवादी समाजों में ऐसा नहीं है.

ख़ामेनेई ने अपने दावों के समर्थन में इस्लामी ग्रंथों और हदीसों का हवाला देते हुए कई धार्मिक संदर्भ दिए. उन्होंने कहा कि महिलाएं "घर में फूल की तरह" होती हैं, जिन्हें घरेलू कामगार समझने के बजाय देखभाल और सम्मान की जरूरत होती है. उन्होंने लिखा, "औरत कोई नौकर नहीं होती. एक फूल की देखभाल और सुरक्षा ज़रूरी है, और वह आपको अपने रंग, खुशबू और गुणों से समृद्ध करेगी."

उन्होंने कहा कि कुरान में मरियम (मैरी) और फिरौन की पत्नी जैसी शख्सियतों को पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया है. उन्होंने तर्क दिया कि ये उदाहरण दर्शाते हैं कि इस्लाम किस प्रकार महिलाओं को सम्मान और आध्यात्मिक दर्जा प्रदान करता है.