बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की हालत ‘बेहद नाजुक’, क्या शेख हसीना की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी लड़ पाएंगी अगला चुनाव?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया की हालत बेहद नाजुक है. फेफड़ों और दिल में संक्रमण के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी सेहत को लेकर राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता है.
नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति में दशकों से प्रभावशाली भूमिका निभाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बिगड़ती सेहत ने देश के राजनीतिक माहौल को गंभीर बना दिया है.
बीएनपी प्रमुख को अचानक सांस और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को 'बेहद गंभीर' बताया. इसी बीच फरवरी में प्रस्तावित चुनावों को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या शेख हसीना की कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इस बार चुनाव मैदान में उतर पाएंगी.
स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता
बीएनपी के अनुसार, 80 वर्षीय खालिदा जिया रविवार देर रात गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल लाई गईं. संक्रमण ने उनके दिल और फेफड़ों को प्रभावित किया. पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बताया कि डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और इसे अत्यंत नाज़ुक बताया है. पार्टी कार्यकर्ता देशभर में मस्जिदों में उनकी स्वस्थता के लिए दुआ कर रहे हैं.
लंबे समय से बीमारियों से जूझ रहीं
खालिदा जिया लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से लड़ रही हैं. उन्हें लिवर, किडनी, डायबिटीज और आंखों से जुड़ी दिक्कतें हैं. पिछले महीनों में भी उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस साल मई में वह चार महीने के उपचार के बाद लंदन से ढाका लौटी थीं. उनकी लगातार बिगड़ती सेहत ने पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावित किया है.
क्या आगामी चुनाव लड़ पाएंगी जिया?
बीएनपी ने नवंबर में घोषणा की थी कि खालिदा जिया फरवरी में होने वाले चुनावों में हिस्सा लेंगी. हालांकि 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में सजा मिलने के बाद उन पर अनेक पाबंदियां लग गई थीं. हसीना सरकार ने तब उन्हें विदेश जाने से भी रोका था. अब जब उनकी सेहत बेहद खराब है, चुनाव लड़ने को लेकर संशय गहरा गया है.
बांग्लादेश की राजनीति में ‘बेगमों की जंग’
खालिदा जिया और शेख हसीना की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को बांग्लादेश में 'बेगमों की जंग' कहा जाता है. दोनों नेता दशकों तक सत्ता में बारी-बारी से आती रहीं. यह प्रतिद्वंद्विता 1975 में शुरू हुई, जब हसीना के पिता शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या की गई. कुछ महीनों बाद जिया के पति राष्ट्रपति जियाउर्रहमान की भी हत्या हुई, जिसके बाद खालिदा ने बीएनपी की कमान संभाली.
सत्ता परिवर्तन और बदला राजनीतिक संतुलन
2024 में छात्र आंदोलन के बाद हसीना सरकार के पतन ने बीएनपी को फिर से मजबूत किया. खालिदा जिया, जिन्होंने अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति प्रणाली को समाप्त कर संसदीय लोकतंत्र लागू किया था, आज भी विपक्ष के लिए एक प्रतीकात्मक शक्ति हैं. उनकी खराब सेहत न सिर्फ पार्टी के लिए, बल्कि बांग्लादेश की बदलती राजनीति के लिए भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है.
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