काबुल में बड़ा धमाका, चीनी रेस्टोरेंट के पास बम ब्लास्ट में 7 की मौत, 13 घायल

काबुल के शाहर-ए-नव इलाके में एक होटल के पास हुए धमाके में कई लोगों की मौत हो गई और अनेक घायल हुए हैं. तालिबान सरकार ने घटना की पुष्टि की है. यह इलाका आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल एक बार फिर हिंसा से दहल उठी. सोमवार को शाहर-ए-नौ इलाके में स्थित एक होटल में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए. यह इलाका आमतौर पर काबुल के सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में गिना जाता है और यहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही रहती है. शुरुआती जानकारी के अनुसार हमले का निशाना चीनी नागरिक बताए जा रहे हैं.

सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में धमाका

सोमवार को काबुल के शाहर-ए-नौ जिले में गुलफरोशी स्ट्रीट पर स्थित एक होटल में अचानक विस्फोट हुआ. यह होटल एक चीनी रेस्तरां के पास है और विदेशी नागरिकों के ठहरने के लिए जाना जाता है. धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाका बेहद शक्तिशाली था.

चीनी नागरिक थे संभावित निशाना

अफगान मीडिया TOLOnews के अनुसार सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि हमला चीनी नागरिकों को लक्ष्य बनाकर किया गया था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कितने चीनी नागरिक इस घटना से प्रभावित हुए. अस्पताल और सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक किसी भी विदेशी नागरिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की है.

अस्पताल में पहुंचने से पहले सात की मौत

काबुल के इमरजेंसी अस्पताल ने बताया कि विस्फोट के बाद 20 घायलों को अस्पताल लाया गया, जिनमें एक बच्चा और चार महिलाएं शामिल थीं. इनमें से सात लोगों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी. अस्पताल प्रशासन ने यह भी साफ नहीं किया कि मृतकों या घायलों में कोई चीनी नागरिक शामिल है या नहीं.

तालिबान और अधिकारियों के बयान

तालिबान अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है, लेकिन अब तक मृतकों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है. काबुल पुलिस प्रवक्ता खालिद जदरान ने बताया कि शहर के चौथे जिले में एक होटल में विस्फोट हुआ, जिससे जानमाल का नुकसान हुआ. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने भी हताहतों की बात स्वीकार की.

आईएस का बना हुआ है खतरा

हाल के वर्षों में शाहर-ए-नौ बड़े हमलों से काफी हद तक बचा रहा है. हालांकि 2025 में काबुल में दो आत्मघाती हमले दर्ज किए गए थे. 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद हिंसा में कमी आई है, लेकिन इस्लामिक स्टेट अब भी तालिबान, विदेशी हितों और आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है.