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India Daily

जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या मामले में कोर्ट का फैसला, गोली मारने वाले शख्स को मिली उम्रकैद की सजा

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री  शिंजो आबे की हत्या मामले में वहां की अदालत ने फैसला सुनाया है. जिसके तहत आरोपी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है.

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Edited By: Shanu Sharma
जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे की हत्या मामले में कोर्ट का फैसला, गोली मारने वाले शख्स को मिली उम्रकैद की सजा
Courtesy: X (@chich00___)

नई दिल्ली: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री  शिंजो आबे की हत्या के मामले में वहां की एक अदालत ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को उम्रकैद की सजा दी है. स्थानिय मीडिया के मुताबिक नारा जिला अदालत ने 45 वर्षीय तेत्सुया यामागामी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. 

तेत्सुया यामागामी ने साल 2022 में आबे की गोली मारकर हत्या कर दी थी. उसने इस जुर्म को कबूल भी किया था. जिसके बाद इस मामले को लेकर पूरे देश में हलचल मच गई.

क्या है पूरा मामला? 

शिंजो आबे जापान के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्ति हैं. प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने एक सांसद के रूप में काम करने का फैसला लिया था. इसी क्रम में 8 जुलाई 2022 को पश्चिमी जापान के नारा शहर में एक ट्रेन स्टेशन के बाहर भाषण के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई. कड़े बंदूक कानूनों वाले जापान में यह घटना पूरे देश के लिए स्तब्ध कर देने वाली थी.

यामागामी ने अक्टूबर में शुरू हुए मुकदमे के दौरान अदालत में हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया था. अभियोजन पक्ष ने उसके लिए उम्रकैद की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया. हालांकि जापानी कानून हत्या के मामलों में मृत्युदंड की अनुमति देता है, लेकिन आमतौर पर अभियोजक तभी इसकी मांग करते हैं जब एक से अधिक हत्याएं हुई हों. इस मामले में अदालत ने उम्रकैद को उचित सजा माना.

अदालत ने क्या कहा?

अदालत में दिए बयान में यामागामी ने कहा कि वह एक विवादित धार्मिक संगठन यूनिफिकेशन चर्च से गहरी नफरत करता था. उसके अनुसार, जब उसने देखा कि शिंजो आबे ने चर्च से जुड़े एक समूह को वीडियो संदेश भेजा है, तो उसने आबे को निशाना बनाने का फैसला किया. उसका दावा था कि वह आबे की हत्या के जरिए चर्च और सत्तारूढ़ नेताओं के बीच संबंधों को उजागर करना चाहता था.

यामागामी के वकीलों ने अदालत से नरमी की अपील करते हुए कहा कि आरोपी एक ऐसे परिवार से आता है जो चर्च से जुड़ा था और उसने बचपन में मानसिक व सामाजिक कठिनाइयों का सामना किया. बचाव पक्ष ने 20 साल से अधिक की सजा न देने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया.