जापान में पाकिस्तान की 'बेइज्जती', अवैध तरीके से बनी मस्जिद पर मचा बवाल; जानें क्या है पूरा मामला?

जापान के कावोगोए शहर में एक मस्जिद का निर्माण किया गया. हालांकि इस मस्जिद को स्थानीय प्रशासन ने अवैध निर्माण बताया है. जिसके बाद पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की बेइज्जती हो रही है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?

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Shanu Sharma

जापान के कावोगोए शहर में इस साल बनाई गई एक मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. जापानी प्रशासन का कहना है कि इस मस्जिद का निर्माण सरकार की अनुमति के बिना किया गया है. जिसके बाद पाकिस्तानी दूतावास ने इस प्रोजेक्ट से खुद को पूरी तरह दूर कर लिया.

जापान के अधिकारियों का कहना है कि इसे गैर-कानूनी रुप से बनाया गया है. जिसकी वजह से अब इसे गिराए जाने का खतरा है. इस मस्जिद को लेकर पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई है. क्योंकि अप्रैल महीने में किए गए उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के राजदूत अब्दुल हमीद मौजूद थे.

क्या है स्थानीय अधिकारियों का आरोप

कावागोए में 4,500 वर्ग मीटर के प्लॉट पर यह मस्जिद बनाई गई है. यह क्षेत्र पहाड़ी जंगल वाली जमीन के रूप में वर्गीकृत है और शहरी विकास नियंत्रण क्षेत्र में आता है, जहां बिना विशेष अनुमति के निर्माण की मनाही है. स्थानीय अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि यह इमारत नगर नियोजन अधिनियम के तहत जरूरी मंजूरी के बिना बनाई गई है.

असाही शिंबुन की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 में इस संपत्ति का मालिकाना हक एक रियल एस्टेट कंपनी से कावागोए स्थित एक फर्म को हस्तांतरित हुआ था. कावागोए नगरपालिका ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि निर्माण कार्य पूरी तरह अवैध है.

पाकिस्तान दूतावास ने जारी किया बयान

इंटरनेशनल बेइज्जती करवाने के बाद अब दूतावास ने सोमवार को एक्स पर बयान जारी किया है. इस बयान में दूतावास की ओर से साफ कहा गया कि उसका इस प्रोजेक्ट से कोई संबंध नहीं है. दूतावास ने जापान में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों से अपील की कि वे स्थानीय कानूनों का पूरी तरह पालन करें. उन्होंने कहा कि पूजा स्थलों के निर्माण सहित किसी भी मामले में जापानी कानूनों का पालन अनिवार्य है. बिना परमिट के कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाना चाहिए.

एक अन्य बयान में दूतावास ने स्पष्ट किया कि राजदूत ने उद्घाटन समारोह में भाग लेने का निमंत्रण तभी स्वीकार किया था, जब आयोजकों ने आश्वासन दिया था कि सभी जरूरी मंजूरियां ली जा चुकी हैं. दूतावास ने जोर देकर कहा कि वह किसी भी ऐसी परियोजना से दूर रहेगा जो जापानी कानूनों का उल्लंघन करती हो.