जापान में फिर कांपी धरती, सुबह-सुबह 6.0 तीव्रता का भूकंप; क्या बड़े खतरे का संकेत?
जापान में रविवार तड़के भूकंप के तेज झटकों से धरती हिल उठी. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.0 दर्ज की गई.
Japan Earthquake: जापान में रविवार की सुबह आम दिनों जैसी नहीं रही. जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, तभी धरती में तेज कंपन महसूस किया गया. भूकंप के इन झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.0 मापी गई. भूकंप का समय सुबह 3 बजकर 45 मिनट दर्ज किया गया. इसका केंद्र जापान के शिमा क्षेत्र से लगभग 58 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में बताया गया है.
एक हफ्ते में दूसरी बार तेज भूकंप से हिली जापानी धरती
जापान में इससे पहले 25 अक्टूबर को भी भूकंप आया था. उस समय इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.3 दर्ज की गई थी. यह भूकंप बोनिन द्वीप के पास आया था, जो प्रशांत महासागर में जापान के क्षेत्र का हिस्सा है. लगातार कुछ दिनों के अंतराल पर तेज भूकंप दर्ज होने से इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों की चर्चा फिर तेज हो गई है.
आखिर जापान में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
जापान की भौगोलिक स्थिति इसकी बड़ी वजह है. यह देश प्रशांत महासागर के उस हिस्से में स्थित है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से मिलती हैं. इन प्लेटों के बीच लगातार हलचल होती रहती है. कभी ये आपस में टकराती हैं तो कभी एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं. इस प्रक्रिया में जमीन के भीतर ऊर्जा जमा होती है, जो अचानक बाहर निकलने पर भूकंप का कारण बनती है.
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धरती के भीतर छिपी है भूकंप की असली वजह
पृथ्वी की ऊपरी सतह कई छोटी-बड़ी प्लेटों में बंटी हुई है. ये प्लेटें लगातार बेहद धीमी गति से खिसकती रहती हैं. इनके आपस में टकराने या रगड़ खाने से चट्टानों पर दबाव बढ़ता जाता है. जब यह दबाव चट्टानों की सहन करने की क्षमता से ज्यादा हो जाता है, तो ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है. इसी ऊर्जा के कारण धरती में कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं.
कितनी तीव्रता का भूकंप माना जाता है खतरनाक?
भूकंप की तीव्रता मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है. आमतौर पर 2.0 या इससे कम तीव्रता वाले भूकंप को सूक्ष्म भूकंप कहा जाता है, जिन्हें अक्सर लोग महसूस नहीं कर पाते. वहीं, 4.5 या इससे अधिक तीव्रता के झटके इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. 7.0 या इससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप गंभीर तबाही का कारण बन सकते हैं. हालांकि, नुकसान कितना होगा, यह भूकंप की गहराई और प्रभावित क्षेत्र की स्थिति पर भी निर्भर करता है.