सात घंटे, 670 KM और कड़ी सुरक्षा…; क्या अमेरिका में खतरे में थी जयशंकर की जान?

अमेरिका में गवर्नमेंट शटडाउन के दौरान उड़ानें बंद होने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सड़क मार्ग से लंबा और जोखिम भरा सफर तय कर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की अहम बैठक समय पर पूरी की.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: कूटनीति के क्षेत्र में सख्त फैसलों और शांत व्यवहार के लिए पहचाने जाने वाले विदेश मंत्री एस जयशंकर एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह कोई बयान नहीं, बल्कि अमेरिका में किया गया उनका असाधारण और चुनौतीपूर्ण सफर है. पिछले साल सितंबर में जब अमेरिकी गवर्नमेंट शटडाउन के कारण देशभर की उड़ानें ठप हो गई थीं, तब जयशंकर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलना था. हाल ही में सामने आई अमेरिकी रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को उजागर किया है.

पिछले साल सितंबर में अमेरिका गंभीर राजनीतिक गतिरोध से गुजर रहा था. बजट पर सहमति न बनने के कारण गवर्नमेंट शटडाउन लागू हुआ, जिसका सीधा असर हवाई सेवाओं पर पड़ा. कई कमर्शियल उड़ानें रद्द कर दी गईं. इसी दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका दौरे पर थे. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में उनकी पूर्व निर्धारित बैठक थी, जिसे टालना कूटनीतिक रूप से संभव नहीं था.

सड़क मार्ग बना एकमात्र विकल्प

उड़ानें रद्द होने के बाद जयशंकर के सामने समय पर न्यूयॉर्क पहुंचने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई. उस वक्त वे अमेरिका-कनाडा सीमा के पास लिविस्टन-क्वीनस्टन ब्रिज क्षेत्र में मौजूद थे. अमेरिकी अधिकारियों ने तुरंत वैकल्पिक योजना बनाई. फैसला हुआ कि उन्हें सड़क मार्ग से मैनहट्टन ले जाया जाएगा. यह सफर करीब 416 मील यानी लगभग 670 किलोमीटर का था, जिसे तय करने में करीब सात घंटे लगने वाले थे.

27 एजेंटों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

इस यात्रा को सामान्य सड़क सफर नहीं माना गया. अमेरिकी डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस ने जयशंकर की सुरक्षा के लिए 27 प्रशिक्षित एजेंट तैनात किए. ये एजेंट न्यूयॉर्क और बफेलो सहित अलग-अलग फील्ड ऑफिस से बुलाए गए थे. हर पड़ाव पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था. काफिला लगातार निगरानी में था ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.

बम स्क्वायड अलर्ट से मचा हड़कंप

रास्ते में एक स्थान पर सुरक्षा टीम बदलते समय स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई. एक विस्फोटक पहचानने वाले पुलिस कुत्ते ने विदेश मंत्री की बख्तरबंद गाड़ी के पास संकेत दिया. इससे हड़कंप मच गया. तुरंत बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया. पूरी गाड़ी और आसपास के क्षेत्र की गहन जांच हुई. राहत की बात यह रही कि कोई खतरा नहीं मिला और काफिले को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई.

बर्फीले रास्तों के बीच समय पर पहुंच

यह सफर मौसम की वजह से भी कठिन था. न्यूयॉर्क के उत्तरी इलाकों में बर्फबारी हो रही थी, विजिबिलिटी कम थी और सड़कें फिसलन भरी थीं. थकान की वजह से बचने के लिए एजेंट बारी-बारी से वाहन चला रहे थे. न्यूयॉर्क पहुंचने पर काफिले ने एक सड़क हादसा भी देखा, जहां एक महिला घायल थी. एक एजेंट ने तुरंत मदद की. तमाम चुनौतियों के बावजूद जयशंकर समय पर बैठक में पहुंचे.