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'अपनी हार को छुपा रहा पाकिस्तान, दुश्मन सेना को भारी नुकसान पहुंचाया', जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाले बलूच विद्रोहियों का दावा

मंगलवार को पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस पर विद्रोहियों ने हमला बोला था. ट्रेन में नौ बोगियों में कुल 425 यात्री सवार थे. यह घटना बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से गुजरते हुए मशकाफ सुरंग के पास पहाड़ी इलाके में हुई, जहां विद्रोहियों ने ट्रेन पर गोलियां चलाईं.

Sagar Bhardwaj

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने गुरुवार को पाकिस्तानी सेना के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जाफर एक्सप्रेस को हाइजैक करने वाले सभी बलूच विद्रोहियों को मार गिराया गया है. इस ट्रेन में 400 से अधिक यात्री बंधक बनाए गए थे. बीएलए ने दावा किया कि कई मोर्चों पर लड़ाई अभी भी जारी है और पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

दुश्मन सेना को भारी नुकसान हो रहा है

बीएलए ने अपने बयान में कहा, "जमीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर जंग जारी है. दुश्मन सेना (पाकिस्तानी सेना) को भारी जानमाल का नुकसान हो रहा है." बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे इस संगठन ने आगे कहा, "कब्जा करने वाली सेना न तो युद्ध के मैदान में जीत हासिल कर पाई है और न ही अपने बंधक सैनिकों को बचा सकी है."

जाफर एक्सप्रेस को कर लिया था हाइजैक

मंगलवार को पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस पर विद्रोहियों ने हमला बोला था. ट्रेन में नौ बोगियों में कुल 425 यात्री सवार थे. यह घटना बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से गुजरते हुए मशकाफ सुरंग के पास पहाड़ी इलाके में हुई, जहां विद्रोहियों ने ट्रेन पर गोलियां चलाईं.

पाकिस्तानी सेना का दावा

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बुधवार को दावा किया कि बंधकों को छुड़ाने की कार्रवाई पूरी हो गई है और मौके पर मौजूद सभी 33 आतंकियों को मार गिराया गया. उन्होंने कहा, "सुरक्षा बलों ने बुधवार शाम तक ऑपरेशन को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया." हालांकि, इस ऑपरेशन में 21 यात्रियों और चार सैनिकों की मौत की भी बात कही गई. जनरल चौधरी ने बताया, "हमने महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों को आजाद कराया. ट्रेन की हर बोगी को सावधानी से खंगाला गया."

पाकिस्तानी सेना पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप

बीएलए ने पाकिस्तानी सेना पर झूठी खबरें फैलाने का आरोप लगाया. संगठन का कहना है कि जिन सैनिकों को "बचाया" गया, उन्हें वास्तव में बीएलए ने अपनी युद्ध नीति और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत रिहा किया था. इसके अलावा, बीएलए ने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना उसकी लड़ाकू ताकत को हराने में नाकाम रही और अब बलूच नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

संगठन ने यह भी कहा कि उसने कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पाकिस्तान ने बातचीत से इनकार कर अपने सैनिकों को मरने के लिए छोड़ दिया. बीएलए ने चेतावनी दी, "अब जब राज्य ने अपने बंधकों को मरने के लिए छोड़ दिया है, तो उनकी मौत की जिम्मेदारी भी उसे ही लेनी होगी."

स्वतंत्र पत्रकारों को मिले सच्चाई पता लगाने की इजाजत

बीएलए ने पाकिस्तान से मांग की कि वह स्वतंत्र पत्रकारों को संघर्ष क्षेत्रों में जाने की इजाजत दे ताकि सेना के जीत के दावों की सच्चाई सामने आ सके. संगठन ने कहा, "अगर कब्जा करने वाली सेना सच में जीत का दावा करती है, तो उसे निष्पक्ष पत्रकारों और स्वतंत्र स्रोतों को युद्धग्रस्त इलाकों में जाने देना चाहिए, ताकि दुनिया पाकिस्तानी सेना के असली नुकसान को देख सके." बीएलए ने यह भी दावा किया कि यह जंग अब पाकिस्तानी राज्य के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है और वह अपने लक्ष्यों को हासिल करने तक लड़ाई जारी रखेगा.