'बेंजामिन शांति के लिए बाधा' अमेरिकी सांसद की टिप्पणी पर आग-बबूला हुआ इजरायल
Israel Hamas War: इजरायल के कट्टर समर्थक और यहूदी अमेरिकी नेता के बयान ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की टेंशन बढ़ा दी है. उन्होंने हाल ही में इजरायल में जल्द चुनाव की मांग करते हुए सीनेट में एक लंबा चौड़ा भाषण दिया था.
Israel Hamas War: इजरायल के कट्टर समर्थक और अमेरिकी सीनेट के नेता चक शूमर ने हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री को शांति में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए जल्द चुनाव के आह्वान की मांग की थी. जिस पर प्रधानमंत्री बेंजामिन की प्रतिक्रिया सामने आई है. सीएनएन को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीनेट के नेता का बयान पूरी तरह अनुचित है. मुझे लगता है कि शूमर ने जो कहा वह पूरी तरह अनुचित है उन्हें इस पर फिर से विचार करना चाहिए. नेतन्याहू ने सीएनएन साक्षात्कार में कहा, मुझे लगता है कि उन्होंने जो कहा वह पूरी तरह से अनुचित है. सहयोगी लोकतंत्र के बारे में इस तरह की बात करना और उसकी सरकार के बदलाव की वकालत करना सर्वथा अनुचित और अन्याय से भरा है.
गुरुवार को सीनेट में दिए गए भाषण में, इजरायल के लंबे समय से समर्थक और यहूदी अमेरिकी नेता शूमर ने इजरायल में नए चुनावों का आह्वान किया था और नेतन्याहू को शांति के लिए बाधा करार दिया था. उन्होंने अपने भाषण में नेतन्याहू के प्रति वाशिंगटन में बढ़ती निराशा, हमास के साथ युद्ध में उनके प्रबंधन, फिलिस्तीनी नागरिकों की रक्षा करने में विफलता और गाजा में सहायता वितरण कार्यक्रम में बाधा पहुंचाने जैसे मुद्दों का हवाला दिया था.
शूमर ने कहा कि इजरायल के लिए दो-राज्य समाधान को अस्वीकार करना एक गंभीर गलती होगी. उन्होंने इजरायल गाजा संघर्ष में वार्ताकारों से युद्धविराम, बंधकों को मुक्त कराने और गाजा में सहायता प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करने का भी आग्रह किया. शूमर ने इस्लामी समूह हमास का समर्थन करने वाले फिलिस्तीनियों की भी आलोचना की और कहा कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण के नेता महमूद अब्बास को भी अलग हट जाना चाहिए. शूमर ने इस बात की भी संभावना जताई कि अगर इजरायल अपना रुख नहीं बदलता है तो वाशिंगटन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा.
हमास के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, गाजा पर इजरायल के सैन्य हमले ने इसकी लगभग पूरी 2.3 मिलियन आबादी को विस्थापित कर दिया है, भुखमरी का संकट पैदा हो गया है, अधिकांश क्षेत्र नष्ट हो गए हैं. इस जंग में 31,000 से अधिक लोग मारे गए हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में गाजा नरसंहार के आरोपों की जांच चल रही है.