US और Israel ने ईरान पर एक साथ किया हमला; भीषण विस्फोट से गूंज उठा तेहरान

वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, इजरायल द्वारा निवारक मिसाइल हमले के रूप में वर्णित कार्रवाई के दौरान तेहरान में भीषण विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: शनिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एक जवाबी मिसाइल हमला किया. परिणामस्वरूप तेहरान में कई जगहों पर भीषण विस्फोट हुए. इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है और नए सिरे से सैन्य टकराव की आशंकाएं पैदा हो गई हैं. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच राजनयिक प्रयास जारी थे. खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन परिसर को भी हमले में निशाना बनाया गया था, और ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई को पहले ही एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा चुका है.

इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर ने क्या कहा?

ईरान-इजरायल के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. इजरायल के डिफेंस मिनिस्टर इजराइल कैट्ज ने अनाउंस करते हुए बताया है कि इजराइल ने ईरान के खिलाफ एक प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक शुरू की है. उन्होंने पूरे देश में एक स्पेशल और इमिडिएट इमरजेंसी की घोषणा कर दी है. उन्होंने कहा, 'इजराइल स्टेट ने इजराइल स्टेट के खिलाफ खतरों को दूर करने के लिए ईरान के खिलाफ एक प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक शुरू की है.' 

आगे कहा है कि इजराइल स्टेट और उसके लोगों के खिलाफ तुरंत मिसाइल और ड्रोन अटैक होने की उम्मीद है. ऐसे में सिविल डिफेंस लॉ के तहत अपने अधिकार के अनुसार, डिफेंस मिनिस्टर इजराइल कैट्ज ने अब इजराइल स्टेट के पूरे इलाके में होम फ्रंट पर एक स्पेशल इमरजेंसी लगाने वाले एक स्पेशल ऑर्डर पर साइन किए हैं. बता दें कि यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बहुत ज्यादा है.

अमेरिका और ईरान ने की थी बातचीत की शुरुआत:

बता दें कि अमेरिका और ईरान ने फरवरी 2026 में अपने लंबे समय से चले आ रहे झगड़े को लेकर बातचीत की शुरुआती की थी. वो एक ऐसे युद्ध से बचना चाहते थे, जिससे मिडिल ईस्ट में बड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती थीं. हालांकि, इजराइल इससे पूरी तरह सहमत नहीं था. उसने कहा कि किसी भी समझौते में न कि सिर्फ न्यूक्लियर फ्यूल बनाने के प्रोसेस को रोकना होगा बल्कि ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी को पूरी तरह खत्म करना होगा.

मिसाइल प्रोग्राम को लिमिट करने वाले नियम पर जोर:

इजराइल ने बातचीत में ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को लिमिट करने वाले नियम जोड़ने के लिए भी अमेरिका पर दबाव डाला था. फिर ईरान इस बात पर सहमत हो गया था कि अगर अमेरिका आर्थिक पाबंदियां हटाता है तो वह अपने न्यूक्लियर काम की लिमिट पर विचार करेगा. हालांकि, उसने न्यूक्लियर मुद्दे को अपनी मिसाइलों से जोड़ने से इनकार कर दिया था. 

ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह जवाबी हमला करेगा. तेहरान ने अमेरिकी सैनिकों वाले पड़ोसी देशों से भी कहा कि अगर अमेरिका ने पहले ईरान पर हमला किया तो वह अमेरिकी बेस पर हमला करेगा. फिर जून में हालात और खराब हो गए. अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी.