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क्या अब खत्म होगा संघर्ष? 45 दिन और बढ़ाई गई इजराइल-लेबनान युद्धविराम की डेडलाइन

इजरायल और लेबनान ने युद्धविराम को 45 दिन बढ़ाया है ताकि शांति वार्ता जारी रह सके. अमेरिका इसकी मध्यस्थता कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हमले अब भी जारी हैं. चलिए जानते हैं अभी स्थिति कैसी है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: इजरायल और लेबनान ने जारी संघर्ष के बीच युद्धविराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति जताई है. यह फैसला वॉशिंगटन में दो दिन चली बातचीत के बाद लिया गया. अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की. पहले यह युद्धविराम रविवार को खत्म होने वाला था लेकिन अब इसे आगे बढ़ाकर दोनों देशों को नई बातचीत का समय दिया गया है.

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बातचीत को बेहद सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि लंबे समय के राजनीतिक समझौते के लिए 2 और 3 जून को फिर बातचीत होगी. इसके अलावा 29 मई को पेंटागन में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच अलग सुरक्षा बैठक भी होगी. अमेरिका का कहना है कि इन वार्ताओं का मकसद स्थायी शांति, सीमा सुरक्षा और दोनों देशों की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करना है.

कैसी है अभी स्थिति?

हालांकि इस कूटनीतिक सफलता के बीच जमीन पर हिंसा जारी है. युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में इजरायल ने हवाई हमले किए. वहीं हिजबुल्लाह ने भी इजरायली सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और रॉकेट हमले किए.

लेबनान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि यह विस्तार आम लोगों के लिए राहत का मौका देगा. उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से हिजबुल्लाह की आलोचना करते हुए कहा कि लेबनान ने विदेशी हितों की वजह से की गई लापरवाह गतिविधियों का काफी नुकसान झेला है. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण लेबनान के कई शहर और गांव इजरायली कब्जे में चले गए.

वॉशिंगटन में इजरायली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे येचिएल लीटर ने कहा कि इजरायल की पहली प्राथमिकता उसकी सुरक्षा है लेकिन बातचीत में सफलता की संभावना भी मजबूत है.

क्या है ईरान की भूमिका?

इस पूरे मामले में ईरान की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. हिजबुल्लाह के प्रमुख समर्थक ईरान ने कहा है कि लेबनान में स्थायी युद्धविराम के बिना किसी बड़े क्षेत्रीय समझौते की संभावना नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र के लेबनान मानवीय समन्वयक इमरान रिजा ने हालात को बेहद चिंताजनक बताया. लेबनानी अधिकारियों के अनुसार मार्च से अब तक करीब 3,000 लोग मारे जा चुके हैं. इसके बावजूद नई बातचीत से स्थायी समाधान की उम्मीद बनी हुई है.