नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर नाकेबंदी लगाने की तैयारी कर रहा है, जिसके जवाब में ईरान ने साफ कहा है कि फारस की खाड़ी या ओमान सागर में कोई बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा. यह चेतावनी अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई बातचीत के विफल होने के कुछ घंटों बाद आई है.
अमेरिकी सेना ने घोषणा की है कि सोमवार को स्थानीय समयानुसार शाम 5:30 बजे से यह नाकेबंदी लागू हो जाएगी. इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति दोनों पर गहरा असर पड़ने की आशंका है. ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि खाड़ी की सुरक्षा या तो सबके लिए है या किसी के लिए नहीं.
ईरान ने सख्त लहजे में कहा है कि अगर उसके बंदरगाहों को निशाना बनाया गया तो फारस की खाड़ी और ओमान सागर के किसी भी बंदरगाह की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती. ईरानी सैन्य कमांड और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बयान जारी कर कहा कि क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा साझा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि 'खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए नहीं'.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी, लेकिन गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच ट्रांजिट जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति रहेगी. ईरान ने इस कदम को अवैध और समुद्री डकैती बताया है. इस घोषणा से क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पहले ही प्रभावित हो चुकी है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है, जहां पहले रोजाना 100 से 135 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या बहुत घट गई है.
पाकिस्तान में हुई उच्च स्तरीय अमेरिका-ईरान वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया, खासकर उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी मांगों पर. वहीं ईरान ने अमेरिकी-इजरायली हमलों के नुकसान की भरपाई और उसके फ्रीज किए गए एसेट्स की रिहाई की मांग की. संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने चेतावनी दी कि 'अगर तुम लड़ोगे तो हम भी लड़ेंगे'.
सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई ने कहा कि ईरान के पास अभी भी कई मजबूत विकल्प बाकी हैं. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य उनके नियंत्रण में है और गैर-सैन्य जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन सैन्य जहाजों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह नाकेबंदी ईरान पर दबाव बढ़ाने का हिस्सा मानी जा रही है.
नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है. अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड 7 प्रतिशत चढ़कर 102.29 डॉलर पर पहुंच गया. संघर्ष शुरू होने से पहले ये कीमतें करीब 70 डॉलर के आसपास थीं. हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, इसलिए किसी भी रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भी लाखों बैरल तेल निर्यात कर रहा था, ज्यादातर गुप्त तरीकों से. ट्रंप प्रशासन हॉर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को कमजोर करना चाहता है. इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अस्थिर हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा.
वर्तमान संघर्ष विराम 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है, लेकिन बातचीत विफल होने से भविष्य अनिश्चित हो गया है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी कोई स्पष्टता नहीं है. अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए इस नाकेबंदी का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है. क्षेत्रीय देशों में चिंता बढ़ गई है क्योंकि कोई भी बंदरगाह अब सुरक्षित नहीं माना जा रहा.
अगर दोनों तरफ से सख्त कदम उठाए गए तो पूरे मध्य पूर्व में बड़ा संघर्ष भड़क सकता है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर रखे हुए है. फिलहाल जहाज मालिक और तेल कंपनियां वैकल्पिक रास्ते तलाश रही हैं. यह घटनाक्रम दिखाता है कि बातचीत के बिना शांति मुश्किल है और छोटी गलती पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है.