'पाकिस्तान को मीडिएटर बनाना बड़ी गलती', अमेरिका से बातचीत को लेकर बोले ईरानी सांसद; परमाणु मुद्दे को लेकर भी कही ये बड़ी बात
ईरानी सांसद महमूद नबावियान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत की अनुमति देने को रणनीतिक गलती बताया है. उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका का हौसला बढ़ा है और ईरान को ज्यादा मांगों का सामना करना पड़ रहा है.
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में चुनने पर ईरान में तेज विरोध शुरू हो गया है. ईरानी संसद के सदस्य महमूद नबावियान ने पाकिस्तान में हुई वार्ताओं को लेकर सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दे को बातचीत में शामिल करना बड़ी गलती थी, जिससे दुश्मन को और ताकत मिली है. वहीं वाइट हाउस ने भी साफ कर दिया है कि स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम भंडार छोड़ना होगा.
पाकिस्तान का मीडिएटर होना ईरानी सांसद को नहीं पसंद
ईरान के सांसद महमूद नबावियान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ चुनने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. बुधवार को उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में परमाणु मुद्दे पर बातचीत की अनुमति देकर ईरान ने रणनीतिक गलती की है. उनके अनुसार इससे अमेरिका को आगे और ज्यादा मांगें करने का हौसला मिल गया है. नबावियान संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य हैं.
क्या बोले महमूद नबावियान?
नबावियान ने स्पष्ट कहा, 'पाकिस्तान की वार्ताओं में हमने एक रणनीतिक गलती की. हमें परमाणु मुद्दे को बातचीत के लिए नहीं रखना चाहिए था.' उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करने से दुश्मन और बेखौफ हो गया है. उन्होंने पाकिस्तान को मध्यस्थ के तौर पर चुनने के सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे अमेरिका को ज्यादा छूट मिल गई.
अमेरिका की मांग
ईरानी सांसद ने अमेरिका की मांगों का जिक्र करते हुए बताया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम हटा दे और इस पर 20 साल तक रोक लगा दी जाए. नबावियान ने कहा कि तेहरान ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को इस दबाव के सामने नहीं झुकना चाहिए.
वाइट हाउस ने क्या कहा
वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने साफ किया कि मौजूदा युद्धविराम की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है और यह अनिश्चित काल तक बढ़ाया जा सकता है. लेविट ने कहा कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए ईरान को अपना पूरा समृद्ध यूरेनियम भंडार सौंपना होगा. उन्होंने जोर दिया कि नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान कोई ठोस प्रस्ताव नहीं पेश करेगा.
नाकाबंदी पर विवाद
वर्तमान युद्धविराम सशर्त है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान औपचारिक प्रस्ताव नहीं देता, नाकाबंदी बनी रहेगी. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नाकाबंदी को युद्ध कृत्य और युद्धविराम का उल्लंघन बताया है. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान इस जबरदस्ती के खिलाफ कड़ा जवाब देगा.
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