ईरान के दरवाजे पर ‘समंदर का दैत्य’! मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभ्यास से बढ़ा जंग का खतरा

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़े एयर फोर्स अभ्यास का ऐलान किया है. अब्राहम लिंकन कैरियर की तैनाती से हालात और संवेदनशील हो गए हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में कई दिनों तक चलने वाले एयर फोर्स सैन्य अभ्यास की घोषणा की है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं और हजारों लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आ चुकी है. भले ही फिलहाल युद्ध की घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन सैन्य हलचल ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य हलचल

अमेरिका के इस ऐलान ने मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है. अमेरिकी एयर फोर्स सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह अभ्यास क्षेत्र में लड़ाकू हवाई ताकत को तैनात करने और लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता दिखाने के लिए किया जाएगा. अभ्यास की तारीख और स्थान को गोपनीय रखा गया है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं कि यह ईरान के बेहद करीब हो सकता है.

समंदर का दैत्य- 'अब्राहम लिंकन कैरियर'

अमेरिकी नौसेना का अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है. इसे अमेरिका की सैन्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है. इस कैरियर में दर्जनों फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, मिसाइल सिस्टम और हजारों सैनिक तैनात हैं. ईरान के पास इसकी मौजूदगी को केवल संयोग नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे रणनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है.

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन

ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब बड़े आंदोलन का रूप ले चुके हैं. शुरुआत महंगाई और बेरोजगारी से हुई, लेकिन जल्द ही यह सरकार और सत्ता व्यवस्था के खिलाफ गुस्से में बदल गया. सड़कों पर उतरे लाखों लोगों पर सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई हुई. अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 6,000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है.

अमेरिका की रणनीति और दबाव

अमेरिका ईरान पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लगातार दबाव बना रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं, हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि अमेरिकी दबाव के कारण ईरान ने सैकड़ों फांसी रोक दीं. इसके बावजूद अमेरिका ने सैन्य ताकत बढ़ाई है, जिससे साफ है कि वह किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहना चाहता है.

क्या युद्ध की ओर बढ़ रहा मिडिल ईस्ट?

फिलहाल अमेरिका इसे सैन्य अभ्यास बता रहा है, लेकिन हालात इशारा कर रहे हैं कि यह सिर्फ अभ्यास तक सीमित नहीं रह सकता. गाजा संकट, ईरान-इजराइल तनाव और क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष ने मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है. सवाल यही है कि क्या यह केवल ताकत दिखाने की कवायद है या आने वाले बड़े टकराव की आहट. दुनिया की नजरें अब इसी जवाब पर टिकी हैं.