तो क्या अब कभी भी नहीं खुल पाएगा होर्मुज? अपने ही जाल में फंस गया ईरान, बारूदी सुरंगें ढूंढने में छूट रहे पसीने
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोल पा रहा है क्योंकि वह खुद के बिछाए समुद्री विस्फोटक खोजने में विफल रहा है. इससे तेल व्यापार प्रभावित हुआ है और इस्लामाबाद वार्ता में नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं.
नई दिल्ली: एक महीने के भीषण तनाव के बाद अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना एक नए तकनीकी संकट में फंस गया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान ने मार्च में छोटी नावों से समुद्री सुरंगें बिछाई थीं लेकिन अब उसे उनके सटीक स्थान की जानकारी नहीं है. विडंबना यह है कि ईरान अब खुद यह भूल गया है कि ये घातक विस्फोटक कहां बिछाए थे. इस समस्या ने न केवल जहाजों की आवाजाही रोकी है बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और शांति वार्ता में भी अनिश्चितता पैदा कर दी है.
ईरानी सेना ने इन सुरंगों को बहुत ही अव्यवस्थित तरीके से बिछाया था और उनका कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं रखा गया. कई विस्फोटक अपनी जगह से बहकर दूसरे क्षेत्रों में चले गए हैं, जिससे उनका पता लगाना और भी खतरनाक हो गया है. हालांकि ईरान ने कुछ सीमित गलियारे खुले रखे हैं लेकिन जहाजों से इसके लिए भारी शुल्क वसूला जा रहा है. सुरक्षा की पूरी गारंटी न होने के कारण टैंकर मालिक अभी भी इस मार्ग के उपयोग से कतरा रहे हैं.
वैश्विक शिपिंग पर गंभीर प्रभाव
2 मार्च को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा इस जलमार्ग को बंद करने की घोषणा के बाद से ही तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया था. दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी महत्वपूर्ण रास्ते से होता है. सुरंगें बिछने के बाद जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य हो गई है. ड्रोन और मिसाइल हमलों के डर ने इस संकट को और गहरा कर दिया है. इस रणनीति ने तेहरान को युद्ध के दौरान सौदेबाजी के लिए एक बड़ा हथियार दे दिया है.
तकनीकी सीमाओं की स्वीकारोक्ति
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने हाल ही में स्वीकार किया कि जलमार्ग को फिर से खोलने में तकनीकी सीमाएं बड़ी बाधा बनी हुई हैं. अमेरिकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान उन सुरंगों को साफ करने में ईरान की तकनीकी लाचारी का सीधा प्रमाण है. समुद्री सुरंगों को हटाना उन्हें बिछाने की तुलना में कहीं अधिक जटिल प्रक्रिया है. ईरान के पास इस काम को सुरक्षित और तेजी से पूरा करने के लिए आधुनिक जहाजों और उपकरणों की भारी कमी है.
शांति वार्ता में बड़ी बाधा
यह गंभीर मुद्दा इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में भी छाया हुआ है . अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने किसी भी संभावित युद्धविराम को इस रास्ते के पूर्ण और सुरक्षित उद्घाटन की शर्त से जोड़ा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधि इस गतिरोध को सुलझाने का रास्ता तलाश रहे हैं. हालांकि जब तक सुरंगों का असली खतरा बना रहेगा तब तक ट्रम्प की कड़ी शर्तों को पूरा करना ईरान के लिए एक असंभव चुनौती नजर आ रहा है .
सैन्य और सुरक्षा जटिलताएं
भले ही अमेरिकी हमलों ने ईरान की कई नौसैनिक संपत्तियों को नष्ट किया है लेकिन तेहरान के पास अभी भी सैकड़ों छोटी नावें मौजूद हैं. ये नावें अतिरिक्त सुरंगें बिछाने या जहाजों को डराने की क्षमता रखती हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में कितनी सुरंगें बिछाई गई हैं. अनिश्चितता का यह माहौल भविष्य में भी इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है जिसे सुलझाना आसान नहीं है.
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