ईरान ने ट्रंप के दावे को बताया सफेद झूठ, किया था 800 कैदियों की फांसी रोकने का दावा, साथ ही दी ये धमकी

ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज किया है जिसमें उन्होंने 800 प्रदर्शनकारियों की फांसी रुकवाने की बात कही थी. साथ ही क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव ने हालात और गंभीर कर दिए हैं.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाजी और तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह गलत बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके हस्तक्षेप से ईरान में 800 प्रदर्शनकारियों को फांसी से बचाया गया. ईरानी न्यायपालिका ने इसे सफेद झूठ करार देते हुए साफ किया है कि न तो ऐसा कोई आंकड़ा मौजूद है और न ही कोई ऐसा फैसला लिया गया. इस बीच मानवाधिकार हनन और सैन्य गतिविधियों को लेकर हालात और जटिल हो गए हैं.

ईरान के शीर्ष अभियोजक मोहम्मद मोवाहितदी ने ट्रंप के बयान को पूरी तरह निराधार बताया है. न्यायपालिका की समाचार एजेंसी मिजान से बातचीत में उन्होंने कहा कि 800 प्रदर्शनकारियों की फांसी रोकने जैसा कोई मामला ही नहीं है. उनके अनुसार, ईरान की न्याय प्रणाली स्वतंत्र है और किसी भी विदेशी दबाव या निर्देश के तहत काम नहीं करती. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है.

डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा बिना किसी आधिकारिक स्रोत या दस्तावेज के किया था. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के ट्रंप से कथित संपर्क और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से बातचीत की खबरों ने अटकलों को जन्म दिया. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह आंकड़ा विदेश मंत्रालय से जुड़ी किसी अपुष्ट जानकारी पर आधारित हो सकता है. फिर भी ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.

प्रदर्शन, मौतों के आंकड़े और विरोधाभास

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 5,002 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें बड़ी संख्या प्रदर्शनकारियों की बताई गई है. इसके अलावा 26,800 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. वहीं, ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर 3,117 मौतों की पुष्टि की है. इन विरोधी आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है.

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य हलचल

इसी बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व की ओर अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है. अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य युद्धपोत दक्षिण चीन सागर से होते हुए भारतीय महासागर की ओर बढ़ रहे हैं. ट्रंप ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर इन ताकतों का इस्तेमाल किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है.

तीखी बयानबाजी और शक्ति प्रदर्शन

ईरान के वरिष्ठ धार्मिक नेता मोहम्मद जवाद हाजी अली अकबरी ने ट्रंप की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी कार्रवाई का सटीक जवाब दिया जाएगा. डे ऑफ द गार्डियन के मौके पर ईरान ने अपनी रिवोल्यूशनरी गार्ड की ताकत दिखाते हुए ड्रोन और सैन्य वीडियो जारी किए. इन संदेशों से साफ है कि ईरान मौजूदा हालात में किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है.