'ईरान ने परमाणु बम सामग्री कभी न रखने पर भरी हामी', ओमान के विदेश मंत्री की बड़ी घोषणा; जानें क्यों लिया ये फैसला
ओमान के विदेश मंत्री बदर अल्बुसैदी ने अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में बड़ी सफलता की बात कही है. ईरान ने सहमति जताई है कि वह कभी भी बम बनाने लायक परमाणु सामग्री अपने पास नहीं रखेगा.
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव के बीच एक सकारात्मक खबर सामने आई है. ओमान, जो लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, अब एक महत्वपूर्ण प्रगति की घोषणा कर रहा है. विदेश मंत्री बदर अल्बुसैदी ने वाशिंगटन में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस से मुलाकात के बाद सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने वाली सामग्री कभी नहीं रखेगा. यह पुराने समझौतों से अलग और मजबूत कदम है, जो युद्ध की आशंका को कम कर सकता है.
ईरान का 'न कभी' वाला वादा
अल्बुसैदी ने इसे सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया. उन्होंने कहा, 'ईरान कभी भी ऐसी परमाणु सामग्री नहीं रखेगा जो बम बना सके.' यह बात ओबामा काल के समझौते में नहीं थी, जो इसे पूरी तरह नया बनाता है. अगर कोई सामग्री स्टॉक नहीं कर सकता, तो बम बनाना असंभव हो जाता है. ओमान के इस मध्यस्थ ने इसे अभूतपूर्व बताया और कहा कि इससे संवर्धन का मुद्दा कम महत्वपूर्ण हो गया है.
शून्य भंडारण और मौजूदा स्टॉक का क्या होगा
प्रस्तावित ढांचे में समृद्ध यूरेनियम का 'शून्य भंडारण' होगा. ईरान के मौजूदा स्टॉक को जितना संभव हो न्यूनतम स्तर तक लाया जाएगा, फिर उसे तटस्थ स्तर पर मिश्रित कर अपरिवर्तनीय ईंधन में बदल दिया जाएगा. अल्बुसैदी ने स्पष्ट किया कि इससे कोई संचय नहीं होगा. यह कदम पिछले समझौतों से बड़ा बदलाव है और परमाणु खतरे को जड़ से खत्म करने की दिशा में मजबूत प्रयास है.
आईएईए की पूरी सत्यापन भूमिका
समझौते में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की व्यापक सत्यापन प्रक्रिया शामिल होगी. अल्बुसैदी ने संकेत दिया कि अगर डील फाइनल हो गई तो अमेरिकी निरीक्षकों को भी पहुंच मिल सकती है. यह सत्यापन सुनिश्चित करेगा कि ईरान प्रतिबद्धताओं का पालन कर रहा है. मध्यस्थता में ओमान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, और अब वियना में तकनीकी बातचीत अगले हफ्ते होगी.
कूटनीति को समय दो, युद्ध नहीं विकल्प
अल्बुसैदी ने जोर दिया कि कूटनीति के अलावा कोई रास्ता नहीं है. उन्होंने कहा, “शांति समझौता हमारी पहुंच में है, बस वार्ताकारों को जरूरी जगह और समय दें.” राष्ट्रपति ट्रम्प की कुछ निराशा के बावजूद, दोनों पक्ष गंभीर हैं. राजनीतिक सहमति जल्दी बन सकती है, जबकि कार्यान्वयन तीन महीने में पूरा हो सकता है. यह ऐतिहासिक मौका है जिसे गंवाना नहीं चाहिए.
ट्रम्प प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता
ट्रम्प ने बातचीत की गति पर असंतोष जताया है, लेकिन अल्बुसैदी का मानना है कि राष्ट्रपति भी सफलता चाहते हैं. जेनेवा में हाल की वार्ताएं तीव्र रहीं, अब वियना में तकनीकी स्तर पर चर्चा होगी. ओमान के प्रयासों से दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ा है. अगर यह डील सफल हुई तो मध्य पूर्व में स्थिरता की नई उम्मीद जगेगी, वरना तनाव और बढ़ सकता है.