Budget 2026

Iran Economic Crisis: पाकिस्तान-श्रीलंका छोड़िए... इस देश में किडनी और लीवर बेचकर घर चला रहे हैं लोग

साल 2023 में पहले श्रीलंका फिर पाकिस्तान में बढ़ी महंगाई की चर्चा पूरे विश्व में हुई. दोनों देश आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. अब साल के आखिर में ईरान में महंगाई की चर्चा ने दुनिया का ध्यान खिंचा है. यहां महंगाई इतनी बढ़ गई है कि लोग किडनी-लीवर बेचकर घर चला रहे हैं.

Om Pratap

Iran inflation rate economic crisis iranians sell kidney liver: साल 2023 की शुरुआत में श्रीलंका और फिर पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा था. अब साल के आखिर में ईरान के महंगाई की चर्चा हो रही है. आलम ये है कि ईरान के लोग महंगाई से निपटने के लिए किडनी और लीवर बेच रहे हैं. बकायदा इसके लिए ईरानी सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डाल रहे हैं. कहा जा रहा है कि ईरान के कुछ इलाकों में तो महंगाई से जूझ रहे लोगों ने पोस्टर बैनर लगाकर अपने बॉडी पार्ट्स को बेचने के बारे में इच्छा जता रहे हैं, ताकि जरूरतमंद उनसे संपर्क कर सकें.

ईरानी मीडिया के मुताबिक, महंगाई से लोग इस कदर जूझ रहे हैं कि वो रोजमर्रा के सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं. आर्थिक संकट के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वर्ल्ड ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने दिसंबर में महंगाई दर की रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक, ईरान में फिलहाल, महंगाई दर 39.2% है. ईरान के सेंट्रल बैंक के मुताबिक, देश में अक्टूबर में महंगाई दर 54.8% थी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, नए साल में भी ईरान में महंगाई दर के 30 फीसदी के आसपास होने की उम्मीद है. 

एक डॉलर के मुकाबले मिल रहे 42,275 ईरानी रियाल

महंगाई से जूझ रहे ईरान के करेंसी की भी हालत बहुत खराब है. ईरान की करेंसी रियाल इस वक्त दुनिया में सबसे कमजोर करेंसी में से एक है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक डॉलर के बदले 42 हजार 275 रियाल मिल रहे हैं. बता दें कि इससे पहले साल 2022 में रियाल को दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी बताया गया था.

आखिर ईरान में क्यों बढ़ी है महंगाई?

दरअसल, अमेरिका की ओर से ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए हैं, जिसकी वजह से ईरान को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. प्रतिबंधों के कारण ईरान का व्यापार भी काफी प्रभावित हुआ है. कई देश ईरान के साथ कारोबार नहीं कर रहे हैं. फिलहाल, इजराइल और हमास के बीच जारी जंग के दौरान ईरान फिलिस्तीन का साथ दे रहा है, जिससे उसे युद्ध के मैदान में भी काफी रियाल खर्च करना पड़ रहा है. इन कारणों से ही ईरानी आर्थिक संकटों से जूझ रहा है.