ईरान का नया सख्त फैसला, होर्मुज से गुजरने वाले हर तेल टैंकर पर 1 डॉलर प्रति बैरल क्रिप्टो टोल
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर 1 डॉलर प्रति बैरल का नया शुल्क लगाने की योजना बनाई है, जिसका भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में किया जाएगा.
नई दिल्ली: ईरान ने विश्व के सबसे व्यस्त तेल मार्ग पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर दिया है. अमेरिका के साथ हालिया युद्धविराम के बावजूद तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हर तेल टैंकर पर 1 डॉलर प्रति बैरल का टोल लगाने की तैयारी कर रहा है. यह शुल्क क्रिप्टोकरेंसी में लिया जाएगा. ईरान का कहना है कि इससे हथियारों की तस्करी रोकी जा सकेगी, लेकिन इस कदम से वैश्विक शिपिंग उद्योग में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है.
ईरान का निगरानी और शुल्क का नया प्लान
ईरान के तेल निर्यातकों के संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने बताया कि सभी जहाजों की पूरी निगरानी की जाएगी. टैंकरों को पहले ईमेल से अपना माल विवरण भेजना होगा, फिर 1 डॉलर प्रति बैरल का क्रिप्टो भुगतान करना होगा. हुसैनी ने साफ कहा कि ईरान को कोई जल्दबाजी नहीं है, इसलिए प्रक्रिया में समय लग सकता है.
बिना अनुमति गुजरने वाले जहाजों पर सख्त चेतावनी
ईरान ने रेडियो पर चेतावनी जारी कर दी है कि बिना पूर्व अनुमति के होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को नष्ट कर दिया जाएगा. पश्चिमी देशों और खाड़ी राष्ट्रों से जुड़े टैंकरों के लिए जोखिम बढ़ गया है. कई शिपिंग कंपनियां अभी नई व्यवस्था स्पष्ट होने तक इंतजार कर रही हैं.
400 टैंकर फंसे, तेल आपूर्ति ठप्प
वर्तमान में करीब 400 जहाज खाड़ी में इंतजार कर रहे हैं. उद्योग विशेषज्ञ इस स्थिति को 'कार पार्किंग' जैसा बता रहे हैं. लाखों बैरल तेल फंसा हुआ है. माएर्स्क जैसी बड़ी कंपनियां स्थिति का जायजा ले रही हैं, लेकिन सामान्य परिचालन शुरू करने से अभी बच रही हैं.
ट्रंप की मांग और ओमान का विरोध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि कोई स्थायी युद्धविराम तभी संभव है जब ईरान होर्मुज को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने की गारंटी दे. वहीं ओमान ने ईरान के इस टोल प्लान का कड़ा विरोध किया है और कहा कि मौजूदा समझौतों के तहत ऐसा शुल्क नहीं लगाया जा सकता.
वैश्विक बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर चल रहा है. कई कंपनियां नए नियमों का इंतजार कर रही हैं. अगर ईरान का यह प्रस्ताव लागू होता है तो विश्व की तेल आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ेगा और कीमतें और बढ़ सकती हैं.
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