क्या ईरान बंद कर देगा बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य? गालिबफ ने दिया संकेत
जब से मिडिल-ईस्ट में युद्ध शुरू हुआ है, तब से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है. अब मोहम्मद बाघर गालिबफ ने एक पोस्ट करते हुए कुछ ऐसी संभावनाएं भी जताई हैं, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य भी बंद हो सकता है.
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से ग्लोबल बिजनेस में काफी रुकावटें देखने को मिल रही हैं. ईरान ने अब एक और अहम समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को निशाना बनाने का संकेत दिया है. शनिवार को ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने एक्स पर एक पोस्ट किया है, जिससे संभावित नई रुकावटों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
गालिबफ ने पोस्ट कर पूरे ये सवाल:
गालिबफ ने पूछा कि दुनिया का कितना प्रतिशत तेल, LNG, गेहूं, चावल और उर्वरक बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है? साथ ही यह भी पूछा कि कौन से देश और कंपनियां इस पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं? जैसा कि सभी जानते हैं जब ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के कारण मौजूदा युद्ध शुरू हुआ था तब से ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है. इससे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए पहले ही गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं और कीमतें बढ़ गई हैं.
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को लेकर यह माना जा रहा है कि ईरान मौजूदा संघर्ष में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इसे बंद कर सकता है. हालांकि, यह सभी संभावनाओं पर आधारित है. अगर ऐसा हो सकता है, तो क्या होगा और आखिर बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य क्या है, चलिए जानते हैं यहां
क्या है बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य?
इसे गेट ऑफ टीयर्स यानी आंसुओं का द्वार कहा जाता है. बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य यमन और जिबूती के बीच मौजूद 30 किलोमीटर का एक जलमार्ग है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. यह दुनिया के सबसे अहम शिपिंग मार्गों में से एक है. यहां से हर दिन करीब 6 मिलियन बैरल तेल और वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. यह स्वेज नहर के रास्ते हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है.
क्या होगा अगर ईरान ने बंद कर दिया ये जलडमरूमध्य:
अगर ईरान होर्मुज की तरह इस जलडमरूमध्य को भी बंद कर देता है तो जहाजों को अफ्रीका में केप ऑफ गुड होप के रास्ते से होकर लंबा रास्त अपनाना होगा. इससे यात्रा में 2 से 3 हफ्ते का समय और लग जाएगा. इसे दुनियाभर में फ्यूल और शिपिंग की लागत बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ भी बढ़ने की उम्मीद बन जाएगी.
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