'होर्मुज के पास एक्सक्लूजन जोन', तीन टैंकरों पर हुए हमले के बाद नया प्लान बना रहा तेहरान
ईरान अब जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास नया प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने की तैयारी में है. ईरान के इस कदम से इलाके से गुजरने वाली हजारों जहाजों पर असर पड़ सकता है. जिससे पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने कहा है कि तेहरान आने वाले दिनों या हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास नए प्रतिबंधित क्षेत्र की घोषणा कर सकता है. यह इलाका अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी वाले क्षेत्र से शुरू होकर होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में फैलने की बात कही गई है.
रेजाई के अनुसार, जो जहाज इस क्षेत्र में प्रवेश करेंगे और जिनकी पहचान होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज के तौर पर होगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, ईरान ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि नए प्रतिबंधित क्षेत्र की निगरानी और कार्रवाई का तरीका क्या होगा.
अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य मौजूदगी
ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं. अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी में मदद के लिए 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए गए हैं. इस अभियान के तहत अब तक 92 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदले जाने और तीन जहाजों को निष्क्रिय किए जाने की जानकारी दी गई है. दोनों देशों के बीच बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ाया है. दूसरी ओर, ईरान ने भी होर्मुज से गुजरने की कोशिश करने वाले कुछ जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी है.
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मिसाइल हमलों के बाद और बढ़ा तनाव
हाल के घटनाक्रमों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और गंभीर बना दिया है. अमेरिका की ओर से ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किए जाने के एक दिन बाद रेजाई का बयान सामने आया. इससे पहले ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं.
ईरान ने रविवार को यह भी दावा किया कि उसने होर्मुज में प्रवेश की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी मानवरहित जहाज को निशाना बनाया. हालांकि, अमेरिकी सेना ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया.होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है. खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से होकर दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचती है. यही वजह है कि ईरान-अमेरिका तनाव के बीच दुनिया की नजर इस जलमार्ग पर बनी हुई है.