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'सीजफायर के लिए गिड़गिड़ा रहा था ईरान', अमेरिका ने किया दावा; तेहरान के पास नहीं था कोई दूसरा रास्ता

अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम लागू हो गया है. अमेरिका ने दावा किया कि ईरान ने सीजफायर के लिए आग्रह किया, जबकि तेहरान ने इसे अपनी जीत बताया. दोनों देशों के नेताओं ने इसे रणनीतिक सफलता के रूप में पेश किया.

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Kuldeep Sharma

पश्चिम एशिया में कई दिनों से जारी तनाव आखिरकार दो हफ्तों के युद्धविराम पर जाकर थम गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान ने भी सीझफायर को स्वीकार करते हुए होर्मुज स्ट्रेट खोलने की अनुमति दे दी. इस फैसले को लेकर अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान सीजफायर के लिए मजबूर था, क्योंकि वह लगातार बढ़ते दबाव को झेल नहीं पा रहा था. दोनों देशों ने समझौते को अपनी-अपनी जीत के रूप में जनता के सामने रखा है.

ईरान पर भारी पड़ा अमेरिकी दबाव

अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान की हालत इतनी खराब थी कि वह लगातार सीजफायर की मांग कर रहा था. हेगसेथ के अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता बेहद कमजोर पड़ चुकी थी और वह चल रहे हमलों का सामना करने में असमर्थ था. उन्होंने ट्रंप सरकार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यही वह निर्णायक क्षण था जब ईरान को युद्ध रोकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था. इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी कि वास्तव में किस पक्ष के ऊपर ज्यादा दबाव था.

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की सफलता का दावा

सीजफायर के बाद मीडिया के सामने आए हेगसेथ ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को अभूतपूर्व सफलता करार दिया. उनके अनुसार, अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लगभग खत्म कर दिया. ईरानी नौसेना को भी गंभीर नुकसान पहुंचा और उसका रक्षा ढांचा बुरी तरह कमजोर हो गया. हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका ने अपनी कुल सैन्य शक्ति का केवल 10% हिस्सा इस्तेमाल किया, और फिर भी ईरान को भारी पराजय झेलनी पड़ी. यह बयान अमेरिका के आत्मविश्वास को दर्शाता है/

सीजफायर केवल एक विराम, स्थायी शांति नहीं

अमेरिकी सेना के प्रमुख जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम स्थायी समाधान नहीं है. उनके अनुसार, यह केवल एक अस्थायी रोक है ताकि आगे की रणनीतिक बातचीत का रास्ता खुल सके. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है. यह बयान संकेत देता है कि हालात अभी भी नाजुक हैं और जरा सी चिंगारी भी संघर्ष को दोबारा भड़का सकती है. इससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है.

समझौते की वजह से खुला होर्मुज स्ट्रेट

दो सप्ताह के सीजफायर का सबसे बड़ा उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना बताया गया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम है. अमेरिका का कहना है कि इस कदम से ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिलेगी, वहीं ईरान ने इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रचारित किया. 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब दोनों पक्ष एक साथ किसी फैसले पर सहमत हुए हैं. अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह युद्ध विराम लंबे समय तक टिक पाएगा.