ईरान के ये 5 घातक हथियार अमेरिका-इजरायल के लिए बने सबसे बड़ी चुनौती, 28 दिन बाद भी दे रहे करारी टक्कर

पिछले 28 दिनों की अमेरिकी-इजरायली बमबारी के बावजूद ईरान के पांच प्रमुख हथियार युद्ध में अब भी सक्रिय हैं. ये मिसाइलें और ड्रोन तेज, सस्ते और रडार से बच निकलने की क्षमता के कारण सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन बावजूद इसके ईरान की युद्ध क्षमता पूरी तरह नहीं टूटी. विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान के कुछ खास हथियार- तेज गति वाली मिसाइलें, मोबाइल लॉन्च सिस्टम और सस्ते लेकिन अत्यधिक प्रभावी ड्रोन अब भी सक्रिय हैं और लगातार जवाबी हमले कर रहे हैं. यही हथियार अमेरिका-इजरायल की उन्नत वायु रक्षा को गहरी चुनौती दे रहे हैं और युद्ध को लंबा खींच रहे हैं.

ईरान की फतह हाइपरसोनिक मिसाइल बनी घातक चुनौती

फतह-1 और फतह-2 मिसाइलें ईरान की सबसे उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइलें मानी जाती हैं. 18,500 किमी/घंटा से अधिक की गति से उड़ने वाली ये मिसाइलें हवा में दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं. यही वजह है कि इजरायल के आयरन डोम या अमेरिका के पैट्रियट सिस्टम इन्हें आसानी से इंटरसेप्ट नहीं कर पाते. भूमिगत बंकरों में छिपे मोबाइल लॉन्चर इन्हें लगातार सक्रिय बनाए हुए हैं. 28 दिनों की बमबारी के बाद भी फतह मिसाइलें कई लक्ष्यों पर प्रभावी हमले कर चुकी हैं.

मिनटों में तैयार होने वाली जोल्फगार बैलिस्टिक मिसाइल

जोल्फगार ईरान की सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे लॉन्च करने में बेहद कम समय लगता है. यह मिसाइल ट्रक-लॉन्चर से फायर की जाती है, जिससे इसका पता लगाना मुश्किल होता है. युद्ध के दौरान इन मिसाइलों ने अमेरिकी बेस और इजरायल के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. लंबे हमलों के बाद भी इनके लॉन्चर तेजी से स्थान बदलते रहे, जिससे इनका ठिकाना ढूंढ पाना चुनौती बन गया. भारी वॉरहेड गिरने पर बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं, और यही अमेरिका-इजरायल की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.

शाहेद-136: सस्ता लेकिन घातक ड्रोन हथियार

ईरान द्वारा बनाए गए शाहेद-136 ड्रोन युद्ध में सबसे किफायती और प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं. इनकी कीमत बेहद कम है, जबकि इन्हें रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली मिसाइलें लाखों डॉलर की होती हैं. यह ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे रडार इनकी पहचान नहीं कर पाता. ईरान इन्हें झुंड में छोड़ता है, जिससे दुश्मन का पूरा डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है. 28 दिनों से जारी हमलों के बाद भी हजारों शाहेद ड्रोन अब भी युद्ध में उपयोग हो रहे हैं और भारी दबाव बना रहे हैं.

लंबी दूरी तक मार करने वाली शाहाब-3 मिसाइलें

शाहाब-3 ईरान की मीडियम-रेंज मिसाइल है, जिसकी पहुंच लगभग 2,000 किलोमीटर तक है. यह मिसाइल इजरायल और खाड़ी क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के लिए सीधी चुनौती है. शाहाब-3 क्लस्टर वारहेड ले जा सकती है, जो एक बार गिरने पर कई छोटे बमों की वर्षा करता है. अमेरिकी और इजरायली हमलों में इसके कई लॉन्चर नष्ट हुए, लेकिन ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में इनका स्टॉक मौजूद है. मोबाइल लॉन्च सिस्टम इन्हें रेगिस्तान, पहाड़ों या घने इलाकों में आसानी से छुपा देता है.

खोर्रमशहर-4: मल्टी-वारहेड वाली ईरान की सबसे खतरनाक मिसाइल

खोर्रमशहर-4 ईरान की सबसे उन्नत और शक्तिशाली मिसाइलों में से एक है. यह कई वारहेड लेकर एक साथ अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकती है. 2,000 किलोमीटर की रेंज और लगभग हाइपरसोनिक गति इसे अत्यंत घातक बनाती है. अमेरिकी बमबारी के दौरान ईरान ने इन मिसाइलों को गहरे भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा, जिससे इन्हें नष्ट करना मुश्किल रहा. इंजीनियरिंग टीमें लगातार इनके नए संस्करण तैयार कर रही हैं. युद्ध के 28 दिन बाद भी यह मिसाइल ईरान की रणनीतिक ताकत का मुख्य आधार है.

इन पांच हथियारों ने साबित किया है कि ईरान अभी भी लड़ाई छोड़ने को तैयार नहीं है. अमेरिका-इजरायल की भारी बमबारी के बावजूद तेज, सस्ते और रडार से बच निकलने वाले ये हथियार पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहे हैं और युद्ध को लंबा खींच रहे हैं.