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Afghanistan Earthquakes: भारत की दरियादली, अफगानिस्तान में भूकंप प्रभावित लोगों के लिए भेजी 15 टन खाद्य सामग्री, 800 से ज्यादा मरे

अफगानिस्तान में आए 6 तीव्रता के भूकंप से 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 2,000 से अधिक घायल हुए. सबसे अधिक तबाही कुनार प्रांत में हुई, जहां कई गांव मलबे में तब्दील हो गए. भारत ने तुरंत मानवीय मदद भेजी और और अधिक राहत सामग्री देने का आश्वासन दिया है.

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Kuldeep Sharma

अफगानिस्तान के पूर्वी इलाकों में रविवार देर रात भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. रिक्टर पैमाने पर 6 की तीव्रता का यह झटका कुनार प्रांत में केंद्रित था, जहां कई गांव ढह गए और सैकड़ों लोगों की जान चली गई. इस आपदा में अब तक 800 से अधिक मौतें और 2,000 से ज्यादा लोग घायल होने की पुष्टि हुई है. इस भयानक आपदा के बीच भारत ने तुरंत राहत सामग्री भेजकर अफगानिस्तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है.

भारत सरकार ने सोमवार को ही अफगानिस्तान के लिए आपातकालीन राहत सामग्री रवाना कर दी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी से बातचीत कर हालात का जायजा लिया और अधिक मदद का आश्वासन दिया.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताते हुए कहा कि भारत हर संभव मानवीय मदद देने के लिए तैयार है. जानकारी के अनुसार भारत ने पहले चरण में 1,000 परिवारों के लिए टेंट और 15 टन खाद्य सामग्री काबुल और कुनार भेजी है. जयशंकर ने कहा कि मंगलवार से और अधिक राहत सामग्री भेजी जाएगी.

कुनार में हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

इस भूकंप के झटके का केंद्र कुनार प्रांत रहा, जहां चौकाय, नुरगल, शिगल और मनोगई जिलों में सबसे ज्यादा तबाही हुई है. कुनार की मजार घाटी के कई गांव भूस्खलन में दब गए. नंगरहार, लगमन और नूरिस्तान प्रांतों से भी भारी नुकसान की खबरें आई हैं. नंगरहार में नौ लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की पुष्टि हुई है. तालिबान अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे बचाव दल दूरदराज के इलाकों तक पहुंचेंगे, हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है.

राहत कार्य में आ रही चुनौतियां

भूकंप से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहे हैं. कई रास्ते भूस्खलन के कारण बंद हो गए हैं, जिससे टीमों को दूरस्थ घाटियों तक पहुंचने में दिक्कत और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. तालिबान प्रशासन ने बताया कि तत्काल जरूरतें मेडिकल सहायता, बचाव उपकरण, अस्थायी आश्रय, खाद्य सामग्री, साफ पानी और भारी मशीनरी की हैं ताकि मलबा हटाया जा सके. स्वास्थ्य मंत्रालय की टीमें एंबुलेंस और दवाइयों के साथ मौके पर भेजी गई हैं. हेलीकॉप्टरों की मदद से गंभीर रूप से घायलों को दूरस्थ इलाकों से निकालकर अस्पताल पहुंचाया जा रहा है.