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India Daily

अब बदलेगा वैश्विक समीकरण!: 3000 जवान, 10 जेट और 5 युद्धपोत भी; भारत-रूस के इस कदम से चीन-अमेरिका कैसे बेहाल?

होर्मुज संकट के बीच भारत और रूस ने बड़ा रक्षा समझौता किया है. इसके तहत दोनों देश एक दूसरे की जमीन पर 3000 सैनिक, 10 सैन्य विमान और 5 युद्धपोत तैनात कर सकेंगे. यह कदम वैश्विक तनाव के बीच बेहद अहम माना जा रहा है.

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Edited By: Babli Rautela
अब बदलेगा वैश्विक समीकरण!: 3000 जवान, 10 जेट और 5 युद्धपोत भी; भारत-रूस के इस कदम से चीन-अमेरिका कैसे बेहाल?
Courtesy: X- @narendramodi

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हमलों की खबरों ने वैश्विक सुरक्षा को हिला दिया है. ऐसे संवेदनशील समय में भारत और रूस के बीच हुआ नया रक्षा समझौता अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मोड़ बनकर सामने आया है. यह कदम उस दौर में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराता जा रहा है और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में 3000 जवान, 10 सैन्य विमान और 5 युद्धपोत तैनात कर सकेंगे, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है. यह साझेदारी न सिर्फ रणनीतिक भरोसे का संकेत मानी जा रही है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में एक नए सुरक्षा ढांचे की शुरुआत भी बताई जा रही है.

क्या है ये RELOS समझौता?

इस रक्षा साझेदारी को RELOS Agreement के नाम से जाना जाता है. इस पर फरवरी 2025 में हस्ताक्षर हुए थे और जनवरी 2026 से यह लागू हो गया है. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को आसान बनाना है. इसके तहत सेना को दूसरे देश में जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे ऑपरेशन और ट्रेनिंग में आसानी होगी.

समझौते के अनुसार दोनों देश एक समय में अधिकतम 3000 सैनिक तैनात कर सकते हैं. इसके अलावा 10 सैन्य विमान और 5 युद्धपोत भी दूसरे देश के क्षेत्र में मौजूद रह सकते हैं. रूस के वरिष्ठ नेता व्याचेस्लाव निकोनोव ने इस व्यवस्था की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को नई ऊंचाई देगा.

सैन्य सुविधाओं का बड़ा विस्तार

इस समझौते का सबसे अहम हिस्सा लॉजिस्टिक सपोर्ट है. इसके तहत मेजबान देश दूसरे देश की सेना को कई तरह की सुविधाएं देगा. युद्धपोतों को बंदरगाह सेवाएं, मरम्मत, पानी और भोजन मिलेगा. वहीं सैन्य विमानों को एयर ट्रैफिक कंट्रोल, नेविगेशन और सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इसके अलावा ईंधन और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, हालांकि इसके लिए भुगतान करना होगा.