वेनेजुएला में आए भूकंप का भारत पर असर! तेल व्यापार पर छाए संकट के बादल?

वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने न केवल दक्षिण अमेरिकी देश में भारी तबाही मचाई है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Shanu Sharma

वेनेजुएला यह आपदा ऐसे समय आई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही भू-राजनीतिक तनावों के कारण अस्थिर बना हुआ है. हाल के महीनों में भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की थी.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करते हुए वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाई थी. अप्रैल और मई के दौरान यह देश भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया.

भारत की तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है असर

ऐसे में वेनेजुएला में आई प्राकृतिक आपदा केवल स्थानीय संकट नहीं रह गई है, बल्कि इसका असर भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. ऊर्जा और बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप का सबसे बड़ा प्रभाव तेल निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है. यदि तेल टर्मिनल सुरक्षित भी रहते हैं, तब भी बिजली आपूर्ति बाधित होने और कई अन्य कारणों से कार्गो की आवाजाही कई दिनों या सप्ताह तक प्रभावित हो सकती है.


वेनेजुएला के प्रमुख कार्गो गेटवे ला गुएरा में आपदा घोषित किए जाने के बाद शिपिंग कंपनियां संभावित देरी और परिचालन संबंधी चुनौतियों का आकलन कर रही हैं. जहाजों को लंबे समय तक लोडिंग का इंतजार करना पड़ सकता है, जिससे डेमरेज शुल्क और परिचालन लागत में बढ़ोतरी की आशंका है.

बीमा लागत और व्यापारिक जोखिम बढ़ने की संभावना

विशेषज्ञों के अनुसार अब तक वेनेजुएला से जुड़े समुद्री बीमा का आकलन मुख्य रूप से राजनीतिक जोखिमों और प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर किया जाता था. लेकिन भूकंप जैसी बड़ी प्राकृतिक आपदा ने जोखिम का एक नया आयाम जोड़ दिया है. यदि तेल आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो बीमा प्रीमियम में वृद्धि, शिपिंग लागत बढ़ने और पूरी सप्लाई चेन पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसका असर अंततः रिफाइनरियों, ट्रेडिंग कंपनियों और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है.

भारत के निवेश पर भी पड़ सकता है प्रभाव

वेनेजुएला में भारत की मौजूदगी केवल तेल खरीद तक सीमित नहीं है. भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ONGC विदेश वहां की तेल परियोजनाओं में हिस्सेदारी रखती है. ऐसे में यदि उत्पादन या परिचालन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो इसका असर भारतीय निवेश और व्यावसायिक हितों पर भी पड़ सकता है. हाल ही में भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा, खनन, आवश्यक खनिज, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई थी. हालांकि ताजा आपदा के बाद इन योजनाओं की गति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशना जरूरी है, लेकिन हर नया आपूर्ति मार्ग अपने साथ अलग तरह के जोखिम भी लेकर आता है.