'ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण होकर रहेगा', तेहरान के इनकार के बावजूद IAEA अड़ा

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने संकेत दिया है कि ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों का निरीक्षण जल्द किया जाएगा. यह अमेरिका-ईरान समझौते का अहम हिस्सा माना जा रहा है, हालांकि तेहरान ने अभी किसी तय कार्यक्रम से इनकार किया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उसके निरीक्षक जल्द ही ईरान के संवर्धन स्थलों का दौरा कर सकते हैं. यह कदम हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते से जुड़ा माना जा रहा है. हालांकि, इस मुद्दे पर वॉशिंगटन और तेहरान के बयानों में अंतर देखने को मिल रहा है, जिससे स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है.

IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते में परमाणु गतिविधियों की निगरानी एजेंसी द्वारा किए जाने का स्पष्ट उल्लेख है. उन्होंने कहा कि निरीक्षण कब शुरू होगा, यह समय का विषय हो सकता है, लेकिन प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता. उनके अनुसार यह समझौते का अनिवार्य हिस्सा है.

अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावे

निरीक्षण को लेकर अमेरिका और ईरान की ओर से विरोधाभासी बयान सामने आए हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल किसी निरीक्षण कार्यक्रम की योजना नहीं है. दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान उच्च स्तर के परमाणु निरीक्षण की अनुमति देने पर पूरी तरह सहमत हो चुका है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी हुई है.


संवर्धन स्थलों पर बनी हुई है चिंता

पिछले वर्ष हुए संघर्ष के बाद से IAEA को ईरान के प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्रों तक पहुंच नहीं मिली है. एजेंसी का कहना है कि वह यह सत्यापित नहीं कर पा रही कि देश में मौजूद संवर्धित यूरेनियम का वास्तविक भंडार कितना है. इसके अलावा यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूज की भी निगरानी नहीं हो पा रही है.

समझौते में क्या है खास?

हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते के तहत ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सीमित करना होगा. इसके बदले में अमेरिका कुछ प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार करेगा. दोनों देशों को व्यापक और स्थायी समझौते के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया है. इसे तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

वैश्विक निगाहें अगले कदम पर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निरीक्षण प्रक्रिया शुरू होती है तो इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी. वहीं निरीक्षण में देरी या मतभेद बढ़ने की स्थिति में क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ सकता है. फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में IAEA की टीम को संवर्धन स्थलों तक पहुंच मिलती है या नहीं.