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धरती के नीचे कैसे बनता है सोना? वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने दुनिया को चौंकाया

धरती के नीचे सोना कैसे बनता है, इसको लेकर एक दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में एक रिसर्च का हवाला देते हुए जानकारी दी गई है.

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Kamal Kumar Mishra

Gold Under Earth: धरती के नीचे सोने के बनने की प्रक्रिया पर एक नई और दिलचस्प रिसर्च सामने आई है. मोनाश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिए यह खुलासा किया है कि कैसे क्वार्ट्ज, जो एक क्रिस्टलीय खनिज है, सोने में बदल सकता है. यह अध्ययन 'नेचर जियोसाइंस' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और इसे 'गोल्ड नगेट पैराडॉक्स' का समाधान माना जा रहा है. रिसर्च में यह बताया गया है कि भूकंप के कारण क्वार्ट्ज में सोने के कण कैसे उत्पन्न होते है.

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मोनाश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोगों में भूकंपीय तनाव की नकल करते हुए क्वार्ट्ज से सोना निकाला. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाला विद्युत क्षेत्र क्वार्ट्ज की सतह पर छोटे-छोटे सोने के कण छोड़ता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि पीजोइलेक्ट्रिक वोल्टेज के कारण यह सोना क्वार्ट्ज में तैरता हुआ दिखाई देता है. भूकंप के झटके क्वार्ट्ज में दरारें उत्पन्न करते हैं, जहां गहरे दबाव के कारण सोने का निर्माण होता है. यह प्रक्रिया पीजोइलेक्ट्रिक इफेक्ट कहलाती है, जिसमें विद्युत क्षेत्र सोने के निर्माण के लिए आवश्यक होता है.

नए अध्ययन में क्या मिला?

यह अध्ययन सोने के बड़े टुकड़ों के बनने के तरीके और क्वार्ट्ज में सोने के जटिल जालों के बारे में नई जानकारी प्रदान करता है. इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि भूकंप की गतिविधियों के चलते धरती के नीचे सोना कैसे बनता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह खोज सोने के उत्पत्ति के पुराने विचारों को बदल सकती है और नए सोने के भंडार की खोज में मदद कर सकती है. यह पीजोइलेक्ट्रिक इफेक्ट पर अधिक अध्ययन करने का भी एक नया रास्ता खोलता है.

ऐसे बनता है सोना

क्वार्ट्ज, जो कि सिलिकॉन और ऑक्सीजन से बना एक क्रिस्टलीय खनिज है, हाइड्रोथर्मल तरल पदार्थों से सोने में बदल सकता है. पृथ्वी की पपड़ी से निकलने वाले हाइड्रोथर्मल तरल पदार्थ क्वार्ट्ज में घुलकर सोना छोड़ते हैं. भूकंप के दबाव से यह प्रक्रिया तेज होती है, जिससे सोने का निर्माण होता है.

भारत के पास कितना है सोना?

सोने के भंडार की बात करें तो दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व अमेरिका के पास है, जहां 8,133 टन सोना जमा है. इसके बाद जर्मनी, इटली, फ्रांस और रूस का नंबर आता है. भारत के पास 840 टन सोना है, जो इस सूची में नौवें स्थान पर है.